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Ruckus in Lok Sabha over no-confidence motion against Speaker Om Birla
नई दिल्ली। लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर मंगलवार को संसद में जोरदार बहस देखने को मिली। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसदीय परंपराओं, सदन के संचालन और विपक्ष को मिलने वाले अवसरों को लेकर सीधा टकराव नजर आया। विपक्ष के कई नेताओं ने बिरला को व्यक्तिगत रूप से “जेंटलमैन” बताया, लेकिन साथ ही यह आरोप भी लगाया कि सरकार के दबाव में सदन की कार्यवाही में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही।
विपक्ष ने उठाए निष्पक्षता और माइक बंद करने के आरोप
कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि, अविश्वास प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध का परिणाम नहीं है, बल्कि संसद की गरिमा और संविधान की रक्षा के लिए लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में कई बार विपक्षी सांसदों के माइक्रोफोन बंद कर दिए जाते हैं और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कई बार रोका गया।
वहीं असदुद्दीन ओवैसी समेत कई विपक्षी नेताओं ने यह सवाल भी उठाया कि जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लंबित है, तब सदन की कार्यवाही अध्यक्षीय पैनल का सदस्य कैसे चला सकता है।
सरकार ने आरोपों को बताया निराधार
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्पीकर ने हमेशा नियमों और संसदीय परंपराओं के अनुसार सदन का संचालन किया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष को सवाल पूछने और जनहित के मुद्दे उठाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट किया कि स्पीकर की अनुपस्थिति में नियमों के तहत अध्यक्षीय पैनल का सदस्य सदन की कार्यवाही संचालित कर सकता है।
10 घंटे की चर्चा के बाद होगा जवाब
अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में कुल 10 घंटे की चर्चा तय की गई है। बहस के अंत में सरकार की ओर से अमित शाह जवाब देंगे। इस प्रस्ताव का नोटिस कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल सहित विपक्ष के 119 सांसदों ने 10 फरवरी को दिया था। अब सभी की नजरें इस बहस के अंतिम नतीजे पर टिकी हैं।