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Samriddhi Jewellers murder case: Four accused sentenced to life imprisonment; jeweller shot dead during robbery.
दुर्ग। अमलेश्वर के बहुचर्चित समृद्धि ज्वेलर्स हत्याकांड में पाटन अपर सत्र न्यायालय ने चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश दुलार सिंह निर्मलकर ने 10 सितंबर को मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपियों को हत्या, लूट और दुकान में घुसने के मामले में दोषी ठहराया। यह वारदात 20 अक्टूबर 2022 को अमलेश्वर के तिरंगा चौक स्थित बजरंग कॉम्प्लेक्स में हुई थी।
दोषी ठहराए गए आरोपियों में बिहार के वैशाली निवासी अनुपम उर्फ अभिषेक कुमार झा, बिहार के गया निवासी सौरभ कुमार सिंह, बिहार के छपरा निवासी आलोक कुमार यादव और उत्तर प्रदेश के चंदौली निवासी अभय कुमार भारती उर्फ बाबू शामिल हैं।
अदालत ने चारों आरोपियों को BNS की धारा 302 और 34 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक आरोपी पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
वहीं धारा 449 और 34 के तहत चारों को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 1-1 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। धारा 397 और 34 के तहत 7 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 1-1 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत ने मुख्य सजाओं को एक साथ चलाने का आदेश दिया है।
इस पूरे मामले में दुकान में लगा लाइव CCTV कैमरा पुलिस जांच और अभियोजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। मृतक सुरेंद्र सोनी का बेटा तनिष्क अपने मोबाइल फोन पर दुकान का लाइव CCTV फुटेज देख रहा था।
घटना के दिन तनिष्क ने पहले CCTV में अपने पिता के साथ दो युवकों को दुकान में देखा था। कुछ देर बाद जब उसने दोबारा मोबाइल पर फुटेज देखा तो वही युवक काउंटर के अंदर घुसकर लॉकर से सामान निकालते दिखाई दिए।
तनिष्क को जब CCTV में अपने पिता नजर नहीं आए तो उसे अनहोनी की आशंका हुई और वह तत्काल बाइक से दुकान की ओर रवाना हुआ।
20 अक्टूबर 2022 को सुरेंद्र सोनी ने रोज की तरह सुबह करीब 10:30 बजे अमलेश्वर के तिरंगा चौक स्थित बजरंग कॉम्प्लेक्स में अपनी समृद्धि ज्वेलर्स की दुकान खोली थी। उस समय वह दुकान में अकेले थे।
दोपहर करीब 12:30 बजे दो युवक ग्राहक बनकर दुकान में पहुंचे। दोनों ने ज्वेलरी देखने के लिए कहा। सुरेंद्र सोनी उन्हें आभूषण दिखा रहे थे। इसी दौरान उनका बेटा तनिष्क अपने मोबाइल फोन पर दुकान का CCTV लाइव देख रहा था।
करीब 1 बजे तनिष्क ने दोबारा CCTV फुटेज देखा। इस दौरान दोनों युवक काउंटर के अंदर घुसे हुए नजर आए। वे लॉकर से सामान निकाल रहे थे, लेकिन CCTV में सुरेंद्र सोनी दिखाई नहीं दे रहे थे।
CCTV में संदिग्ध गतिविधि देखने के बाद तनिष्क तुरंत घर से बाइक लेकर दुकान के लिए निकला। रास्ते में उसे एक बाइक पर तीन लोग जाते हुए दिखाई दिए।
जब वह दुकान पहुंचा तो उसके पिता सुरेंद्र सोनी घायल अवस्था में मिले। दुकान का लॉकर खुला हुआ था और वहां से आभूषण व नकदी गायब थी। पुलिस जांच में सामने आया कि लूट के दौरान सुरेंद्र सोनी को गोली मारी गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई।
वारदात की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। मौके से 7.65 एमएम के चार खाली कारतूस, एक जिंदा राउंड और देशी कट्टे से संबंधित एक खाली खोखा बरामद किया गया।
इसके अलावा खून के नमूने और अन्य सामग्री भी जांच के लिए सुरक्षित की गई। दुकान में लगे CCTV सिस्टम का DVR भी पुलिस ने जब्त किया, ताकि पूरी रिकॉर्डिंग की जांच की जा सके।CCTV रिकॉर्डिंग की सत्यता से संबंधित प्रमाण-पत्र भी जांच में शामिल किया गया। बाद में अदालत में CCTV फुटेज को महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने चार आरोपियों की पहचान की। पुलिस के अनुसार चारों अलग-अलग राज्यों से जुड़े हुए थे। अनुपम उर्फ अभिषेक कुमार झा बिहार के वैशाली, सौरभ कुमार सिंह गया, आलोक कुमार यादव छपरा और अभय कुमार भारती उर्फ बाबू उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले का निवासी था।
पुलिस ने चारों आरोपियों को वाराणसी से गिरफ्तार किया था। जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उन्हें अदालत में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने मामले में प्रत्यक्ष एवं अन्य गवाहों के बयान, CCTV फुटेज, घटनास्थल से बरामद सामग्री और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के सामने रखे।
अभियोजन के मुताबिक चारों आरोपी एक राय होकर ज्वेलरी दुकान में घुसे थे। उनका उद्देश्य दुकान में लूट करना था। आरोपियों के पास पिस्टल और देसी कट्टा था। लूट के दौरान सुरेंद्र सोनी को गोली मार दी गई। गोली लगने से उनकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपी दुकान से सोने-चांदी के आभूषण और नकदी लेकर फरार हो गए। अदालत ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर चारों आरोपियों को दोषी माना।
मामले में अभय कुमार भारती और सौरभ कुमार सिंह पर अवैध हथियार रखने और उसके इस्तेमाल के आरोप भी लगाए गए थे। अदालत ने दोनों को आयुध अधिनियम की धारा 25(1), 1-ख(ख) के तहत 2 वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इसके अलावा धारा 27(3) के तहत दोनों को आजीवन कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। यानी दोनों आरोपियों को हत्या के मामले में मिली उम्रकैद के अलावा हथियार से जुड़े अपराध में भी आजीवन कारावास की सजा मिली है।
सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत से आरोपियों के प्रति नरमी बरतने की अपील की। बचाव पक्ष की ओर से आरोपियों का यह पहला अपराध होने का हवाला देते हुए सजा कम करने का अनुरोध किया गया था।
वहीं अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को कठोरतम सजा देने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को हत्या, लूट और दुकान में घुसने के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
समृद्धि ज्वेलर्स में 20 अक्टूबर 2022 को हुई हत्या और लूट की इस वारदात में करीब 3 साल 11 महीने बाद अदालत का फैसला आया है।
इस मामले की जांच में सबसे अहम कड़ी दुकान का लाइव CCTV कनेक्शन रहा। मृतक के बेटे तनिष्क के मोबाइल पर दुकान का लाइव फुटेज आना और उसमें आरोपियों की गतिविधियां दिखाई देना पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
अदालत में CCTV फुटेज समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक, दस्तावेजी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन ने अपना पक्ष रखा, जिसके बाद चारों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई।