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Search for new Tata Sons chairman begins; T.V. Narendran emerges as the frontrunner; N. Chandrasekaran to remain in the role until February 2027.
नई दिल्ली। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने के फैसले के बाद टाटा समूह में उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है। 13 अगस्त 2026 को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सिलेक्शन कमेटी गठित करने की दिशा में कदम उठाया। इस बीच टाटा स्टील के MD टीवी नरेंद्रन का नाम संभावित उत्तराधिकारियों में प्रमुखता से सामने आ रहा है।
एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से तत्काल प्रभाव से हटने के बजाय अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करने का फैसला किया है। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा और वे इसके बाद नए कार्यकाल के लिए अपना नाम आगे नहीं रखेंगे। इससे टाटा संस को नए नेतृत्व के चयन और जिम्मेदारियों के सुचारु हस्तांतरण के लिए कई महीनों का समय मिलेगा।
चंद्रशेखरन ने अपने फैसले के पीछे नेतृत्व को लेकर स्पष्टता की जरूरत को महत्वपूर्ण कारण बताया है, ताकि कर्मचारियों, निवेशकों और अन्य हितधारकों के बीच भविष्य के नेतृत्व को लेकर समय रहते स्पष्टता बनी रहे।
टाटा समूह की उत्तराधिकार प्रक्रिया में सिलेक्शन कमेटी की अहम भूमिका होगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने इस कमेटी के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कमेटी संभावित उम्मीदवारों का आकलन करेगी और उपयुक्त नाम की सिफारिश टाटा संस बोर्ड को करेगी। अंतिम नियुक्ति का फैसला टाटा संस बोर्ड के स्तर पर होगा।
इस प्रक्रिया में टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस बोर्ड दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। ऐसे में नए चेयरमैन का चयन केवल किसी एक उम्मीदवार की योग्यता पर नहीं, बल्कि समूह के दीर्घकालिक नेतृत्व और रणनीतिक दिशा को ध्यान में रखकर होने की उम्मीद है।
उत्तराधिकारी की चर्चा में टीवी नरेंद्रन का नाम प्रमुखता से उभर रहा है। वे लंबे समय से टाटा समूह से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। टाटा स्टील जैसे बड़े और वैश्विक कारोबार को संभालने का उनका अनुभव उन्हें इस दौड़ में मजबूत उम्मीदवार बनाता है।
नरेंद्रन ने टाटा स्टील के सामने मौजूद वित्तीय और परिचालन चुनौतियों के बीच कारोबार को मजबूत करने पर ध्यान दिया है। उनके नेतृत्व में कंपनी ने कर्ज, कैश फ्लो और घरेलू कारोबार से जुड़े मुद्दों पर फोकस किया, जबकि यूरोप में कंपनी के जटिल कारोबारी हालात से निपटना भी उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा रहा है।
करीब चार दशक का टाटा समूह से जुड़ा अनुभव भी उनके पक्ष में अहम माना जा रहा है। हालांकि, अभी तक टाटा संस ने उन्हें नए चेयरमैन के रूप में आधिकारिक तौर पर नामित नहीं किया है।
उत्तराधिकारी की तलाश के बीच टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े कुछ कानूनी और प्रशासनिक मुद्दे भी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से जुड़े निर्देशों के कारण सर रतन टाटा ट्रस्ट की ट्रस्टी बैठक और निर्णय प्रक्रिया पर असर पड़ा है। इससे चयन कमेटी के लिए ट्रस्ट की ओर से नामांकन की प्रक्रिया में देरी की आशंका जताई जा रही है।
ऐसे में टाटा समूह के सामने एक तरफ नए चेयरमैन की तलाश पूरी करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच नेतृत्व से जुड़े मुद्दों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने की जरूरत भी है।
टाटा संस के नेतृत्व को लेकर नोएल टाटा के नाम की भी चर्चा होती रही है, लेकिन 2022 में किए गए नियमों में बदलाव के बाद टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस के चेयरमैन का पद एक ही व्यक्ति के पास होने पर रोक है। इसलिए नोएल टाटा के अंतरिम रूप से टाटा संस की कमान संभालने की संभावना सीमित मानी जा रही है।
टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और समूह की कई बड़ी कंपनियों पर इसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। दूसरी ओर, टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस के सबसे बड़े शेयरधारकों में शामिल हैं और समूह के परोपकारी एवं सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। Reuters के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी है।
यही वजह है कि टाटा संस के अगले चेयरमैन का चयन केवल एक कॉरपोरेट नियुक्ति नहीं, बल्कि पूरे टाटा समूह की भविष्य की रणनीति और नेतृत्व संरचना के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।