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Smriti Irani takes a stern stance on the rift between the government and the party organization within the Chhattisgarh BJP; demands an account of work from the ministers.
रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी ने अपने पहले दौरे के अंतिम दिन पार्टी के नेताओं और मंत्रियों को सत्ता तथा संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाने की नसीहत दी। दो दिनों तक चली बैठकों में सामने आए फीडबैक से कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों के बीच संवाद की कमी उजागर हुई। स्मृति ने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करना, उनकी समस्याओं को सुनना और जनता के बीच सक्रिय रहना पार्टी की प्राथमिकता होनी चाहिए।उन्होंने विधायकों को दीपावली के अवसर पर अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के साथ सामूहिक भोज आयोजित करने की सलाह भी दी। सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में स्मृति ईरानी ने विधायकों, सांसदों, मंत्रियों और पार्टी के कोर ग्रुप के साथ अलग-अलग बैठकें कीं।बैठकों में सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन, जनता से सीधे संपर्क, विकास कार्यों की निगरानी और केंद्रीय योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव, सह प्रभारी सिद्धार्थ शंभू, संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह और उपमुख्यमंत्री अरुण साव तथा विजय शर्मा सहित कई मंत्री, सांसद और विधायक मौजूद रहे।
प्रदेश प्रभारी के सामने पूर्व सांसदों और विधायकों के बाद मौजूदा सांसदों ने भी मंत्रियों के कामकाज को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। सांसदों का कहना था कि उनकी सिफारिशों को गंभीरता से नहीं लिया जाता और उनके माध्यम से उठाए गए जनहित के काम भी आगे नहीं बढ़ते।बैठक में एक सांसद ने शिकायत की कि कार्यकर्ता अब उनसे कहते हैं कि वे केवल पत्र लिखने तक सीमित रहें, क्योंकि संबंधित काम दूसरे माध्यमों से आसानी से हो जाते हैं। एक अन्य सांसद ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रशासनिक तंत्र में व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता दी जा रही है।इस पर स्मृति ईरानी ने एक वरिष्ठ सांसद से पूछा कि ऐसी स्थिति क्यों बन रही है। जवाब में सांसद ने कहा कि प्रदेश में नौकरशाही का प्रभाव बढ़ गया है, जिसके कारण जनप्रतिनिधियों की भूमिका कमजोर पड़ रही है।शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव तथा विजय शर्मा को भी बैठक में बुलाया गया। स्मृति ने सभी की मौजूदगी में सांसदों से उनकी समस्याएं विस्तार से रखने को कहा। इसके बाद सांसदों ने दोबारा अपनी शिकायतें सामने रखीं। एक सांसद ने यहां तक कहा कि जब केंद्रीय राज्य मंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष तक की बात नहीं सुनी जाती, तो अन्य जनप्रतिनिधियों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्मृति ईरानी के सामने रविवार को हुई पूर्व सांसदों और विधायकों की बैठक में भी मंत्रियों के कामकाज को लेकर कई शिकायतें आई थीं। पूर्व सांसद गोविंद मिरी ने अपनी बेटी के तबादले का मामला उठाते हुए बताया था कि वह पिछले ढाई साल से इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।शिकायत सामने आने के बाद स्मृति ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से इस विषय पर चर्चा की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित फाइल मंगवाई और तबादले का आदेश जारी करा दिया। सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने आदेश की प्रति स्मृति ईरानी को भी सौंप दी। स्मृति ने संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह को निर्देश दिया कि आदेश पूर्व सांसद तक पहुंचाया जाए।
स्मृति ईरानी मंत्रियों के विभागीय कामकाज और उनके खिलाफ मिली शिकायतों से जुड़ी रिपोर्ट के साथ बैठक में पहुंची थीं। उन्होंने एक-एक मंत्री से उनके विभाग की स्थिति पर जवाब मांगा और कामकाज में सुधार के निर्देश दिए।मंत्री दयालदास बघेल को लेकर सबसे अधिक शिकायतें सामने आने की बात कही गई। स्मृति ने उनसे कहा कि विभाग में उनकी सक्रियता स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। इसके अलावा टंकराम वर्मा और श्याम बिहारी जायसवाल को भी अपने विभागों की कार्यप्रणाली बेहतर बनाने की हिदायत दी गई।शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से विभाग में फर्जी तबादलों के मामले सामने आने पर जवाब मांगा गया। स्मृति ने ऐसे मामलों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए। अन्य मंत्रियों से बजट का समय पर उपयोग करने, लंबित कार्यों में तेजी लाने और विभागीय जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने को कहा गया।
बैठक में मंत्रियों की ओर से अपने प्रभार वाले जिलों का नियमित दौरा नहीं करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। स्मृति ईरानी अपने साथ ऐसी रिपोर्ट लेकर आई थीं, जिसमें मंत्रियों के जिला दौरों का विवरण शामिल था।उन्होंने कहा कि जो मंत्री नियमित रूप से अपने प्रभार वाले जिलों में नहीं जाते, उनसे यह जिम्मेदारी वापस लेने पर विचार किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, प्रभारी मंत्री की भूमिका केवल प्रशासनिक बैठकों तक सीमित नहीं है। उसे सरकार और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ कार्यकर्ताओं की समस्याओं को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।स्मृति ने निर्देश दिया कि मंत्री पहले कार्यकर्ताओं की बात सुनें और उसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक करें। दीपावली जैसे त्योहारों पर प्रभारी जिलों में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और मेल-मिलाप के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएं।
स्मृति ईरानी ने सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल को आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने संकेत दिया कि यदि जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और कार्यकर्ताओं के बीच मौजूदा दूरी बनी रहती है, तो 2028 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।बैठकों से मिले संदेश के मुताबिक, प्रदेश भाजपा नेतृत्व अब मंत्रियों की सक्रियता, जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के समाधान और संगठन के साथ नियमित संवाद पर अधिक जोर देना चाहता है। स्मृति ईरानी की इन बैठकों को सरकार और संगठन के कामकाज की समीक्षा के साथ आगामी चुनावों की तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।