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Snakebite fraud case: Investigation incomplete despite 15 FIRs; awaiting handwriting analysis report.
बिलासपुर। सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों में 15 एफआईआर दर्ज होने के बावजूद जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि कई अहम दस्तावेज फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं, लेकिन हस्तलिपि विशेषज्ञ की रिपोर्ट अब तक नहीं मिलने से विवेचना अंतिम चरण तक नहीं पहुंच पाई है।
पुलिस के अनुसार विभिन्न थानों में दर्ज गंभीर अपराध, कानून व्यवस्था की जिम्मेदारियां और वीआईपी ड्यूटी के कारण जांच प्रभावित हुई है। मामले में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने और दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जरूरत के चलते कार्रवाई अपेक्षा से धीमी चल रही है। कुछ अधिकारियों ने जांच सीबीआई को सौंपने का सुझाव भी दिया है, हालांकि इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
विधानसभा में मामला उठने के बाद जिला प्रशासन की निगरानी में करीब एक वर्ष तक जांच चली। इसके बाद तहसीलदार की शिकायत पर जिले के अलग-अलग थानों में 15 अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अधिवक्ताओं, तहसील कार्यालय के कर्मचारियों और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। फिलहाल सभी मामलों में जांच जारी है।
पुलिस अब तक इस प्रकरण में 20 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें अधिवक्ता, उनके सहयोगी, पूर्व अधिकारी, बैंक कर्मचारी, पटवारी और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की भूमिका और आर्थिक लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं।
जांच के दौरान अधिवक्ताओं द्वारा प्रस्तुत पीएम रिपोर्ट, मर्ग इंटीमेशन, पटवारी प्रतिवेदन समेत कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं। इन दस्तावेजों को हस्तलिपि और अन्य वैज्ञानिक परीक्षण के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों के पास भेजा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है।
पुलिस वर्ष 2023 से 2025 के बीच बिलासपुर में पदस्थ रहे सभी तहसीलदारों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अब तक की जांच में सामने आया है कि आठ मामलों में आवेदक और हितग्राही की अनुपस्थिति में ही मुआवजा राशि जारी कर दी गई थी। इसके अलावा एक एसडीएम की भूमिका की भी अलग से जांच की जा रही है।