

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Supreme Court's big decision: Meritorious reserved students will be entitled to 'general' seats
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि मेधावी आरक्षित छात्र, यानी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के वे अभ्यर्थी जो सामान्य (जनरल) श्रेणी की कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त करते हैं, उन्हें अनारक्षित या जनरल सीटों पर समायोजित करना अनिवार्य होगा। इस निर्णय से देशभर की भर्ती प्रक्रियाओं में मेरिट का महत्व और बढ़ जाएगा।
कानूनी दृष्टिकोण
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने केरल हाई कोर्ट के 2020 के फैसले को निरस्त करते हुए कहा कि अनारक्षित श्रेणी सामान्य वर्ग का कोटा नहीं है, बल्कि यह एक खुला पूल है जहां केवल योग्यता के आधार पर चयन होता है। कोर्ट ने इसे ‘मेरिट इंड्यूस्ड शिफ्ट’ के रूप में परिभाषित किया।
आरक्षित छात्रों के अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई आरक्षित छात्र सामान्य कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो वह जनरल सीट पर समायोजित किया जाएगा। इससे आरक्षित कोटे की सीटें उसी वर्ग के अगले योग्य उम्मीदवारों के लिए खुली रहेंगी। यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के अनुरूप समान अवसर सुनिश्चित करता है।
देशभर में लागू नजीर
यह फैसला सभी सरकारी और सार्वजनिक भर्ती प्रक्रियाओं में लागू होगा और मेधावी अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेगा। विशेषज्ञ इसे आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं, जो उनके अधिकारों और मेरिट के महत्व को स्पष्ट करता है।