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Supreme Court expresses strong concern over digital arrests... Even educated people are becoming easy targets of fraud: CJI Surya Kant
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तेजी से बढ़ रहे साइबर ठगी के मामलों, खासकर डिजिटल अरेस्ट जैसे खतरनाक ट्रेंड पर गहरी चिंता जताई है। सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि शिक्षित और समझदार लोग भी इस तरह के धोखे का शिकार हो रहे हैं।
बुजुर्ग महिला का मामला बना उदाहरण, पूरी जमा पूंजी हो गई साफ
कोर्ट ने एक ऐसे मामले का जिक्र किया, जिसमें एक बुजुर्ग महिला अपनी पूरी सेवानिवृत्ति की राशि गंवा बैठीं। सीजेआइ ने कहा कि वह इस पीड़िता को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी जीवन भर की बचत ठगों ने हड़प ली। इस घटना ने डिजिटल ठगी के खतरनाक असर को उजागर कर दिया है।
क्या है डिजिटल अरेस्ट, कैसे फंसाते हैं ठग
डिजिटल अरेस्ट एक नया साइबर अपराध तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, अदालत या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क करते हैं। वे ऑडियो या वीडियो कॉल के जरिए डर का माहौल बनाते हैं और व्यक्ति को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर अपराध में फंस चुका है।इसके बाद पीड़ित को ऑनलाइन ही बंधक जैसा बना दिया जाता है और उस पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है। डर और भ्रम की स्थिति में कई लोग अपनी जमा पूंजी तक गंवा देते हैं।
सरकार से जवाब तलब, सुनवाई फिलहाल टली
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कोर्ट को बताया कि विभिन्न विभागों में इस समस्या को लेकर लगातार बैठकें चल रही हैं और ठगी पर रोक लगाने के उपायों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया।कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 12 मई तक स्थगित कर दी, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है।
स्वतः संज्ञान लेकर हो रही सुनवाई, बढ़ती ठगी पर कोर्ट की नजर
सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की सुनवाई स्वतः संज्ञान के आधार पर कर रहा है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि केवल तकनीकी उपाय ही नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह के साइबर अपराधों को रोका जा सके।
संदेश साफ: डर नहीं, सतर्कता ही बचाव का रास्ता
डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों ने यह साबित कर दिया है कि आज के दौर में सिर्फ शिक्षित होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि साइबर जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी इस दिशा में एक बड़ा संकेत है कि अब इस खतरे से निपटने के लिए सामूहिक और ठोस प्रयासों की आवश्यकता है।