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Why was the PM's visit postponed? What happened at the refinery just before the inauguration?
बाड़मेर। राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित पचपदरा की हाईटेक रिफाइनरी में बड़ा हादसा हो गया, जिसके चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तय दौरा अचानक स्थगित करना पड़ा। मंगलवार को सुबह 11 बजे इस मेगा प्रोजेक्ट का उद्घाटन होना था, लेकिन उससे करीब 20 घंटे पहले ही भीषण आग ने पूरे कार्यक्रम की दिशा बदल दी।
₹3000 करोड़ की यूनिट में लगी आग, उठीं आसमान छूती लपटें
सोमवार दोपहर करीब 1 बजकर 52 मिनट पर रिफाइनरी की सीडीयू यूनिट में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और करीब 100 फीट तक धुएं और लपटों का गुबार उठता नजर आया। हालात इतने गंभीर थे कि करीब 40 फायर ब्रिगेड की टीमों को मौके पर पहुंचकर करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाना पड़ा।यह वही यूनिट थी जहां प्रधानमंत्री को प्रतीकात्मक रूप से पहिया घुमाकर रिफाइनरी का उद्घाटन करना था। 13 साल के लंबे इंतजार के बाद यह ऐतिहासिक क्षण आने वाला था, लेकिन हादसे ने सब कुछ रोक दिया।
रिफाइनरी का दिल मानी जाने वाली यूनिट को भारी नुकसान
सीडीयू यूनिट को रिफाइनरी का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। यही वह जगह है जहां कच्चे तेल को प्रोसेस कर उपयोगी उत्पादों में बदला जाता है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग की वजह हीट एक्सचेंजर से तेल का रिसाव माना जा रहा है।इस यूनिट में बेहद उच्च तापमान और दबाव के बीच प्रक्रिया चलती है। जब छोटे से छेद से तेल लीक हुआ तो उसने तुरंत आग पकड़ ली। हालांकि सुरक्षा सिस्टम के तहत शट ऑफ वाल्व ने समय रहते तेल की सप्लाई रोक दी, जिससे लगभग डेढ़ घंटे में आग को काबू में किया जा सका।
देश की ऊर्जा रणनीति पर भी पड़ सकता है असर
यह रिफाइनरी देश के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। यहां हर साल 75 लाख मीट्रिक टन आयातित कच्चे तेल के साथ साथ 15 लाख टन स्थानीय उत्पादन को भी प्रोसेस किया जाना था। इससे भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा था।रूस यूक्रेन युद्ध के बाद भारत सस्ते कच्चे तेल को खरीदकर उसे रिफाइन कर यूरोप में बेच रहा है। पचपदरा रिफाइनरी इसी योजना का अहम हिस्सा थी। ऐसे में इस हादसे के कारण उत्पादन में देरी होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
अब आगे क्या, कब शुरू होगा प्रोजेक्ट
फिलहाल तकनीकी विशेषज्ञ नुकसान का आकलन कर रहे हैं। यदि आयातित उपकरणों को ज्यादा क्षति पहुंची है तो मरम्मत में कई महीने लग सकते हैं। ऐसे में इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट के शुरू होने में और देरी तय मानी जा रही है।
13 साल का इंतजार, 20 घंटे पहले हादसा, बदल गया पूरा प्लान
यह घटना सिर्फ एक औद्योगिक हादसा नहीं बल्कि उस उम्मीद पर भी झटका है जो वर्षों से इस प्रोजेक्ट से जुड़ी हुई थी। उद्घाटन से कुछ घंटे पहले हुआ यह हादसा अब जांच और सुधार की नई चुनौती बनकर सामने आया है।