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Supreme Court orders removal of experts from NCERT's chapter on 'Corruption in the Judiciary'
नई दिल्ली। कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में शामिल NCERT विवादित अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक वाले विवादित अध्याय का मसौदा तैयार करने वाले तीनों विशेषज्ञों से तत्काल संबंध समाप्त किए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर मिशेल डैनियल, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार को किसी भी ऐसी जिम्मेदारी से दूर रखने का आदेश दिया है, जिसमें पूरी या आंशिक रूप से सार्वजनिक धन का उपयोग होता हो।
नई विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश
NCERT विवादित अध्याय मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह के भीतर नई विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया। इस समिति में एक पूर्व न्यायाधीश, एक शिक्षाविद और एक प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई सुनवाई के दौरान दिया। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार से विवादित अध्याय तैयार करने वाले विशेषज्ञों के नाम और उस बैठक का विवरण मांगा था, जिसमें इस अध्याय को मंजूरी दी गई थी।
बिना अनुमोदन के पाठ्यक्रम मंजूर होने पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि हलफनामे से यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि संबंधित पाठ्यक्रम को बिना उचित अनुमोदन के ही मंजूरी दे दी गई। अदालत ने यह भी कहा कि इस विषय पर चर्चा करने वाली समिति के सामने मामला रखा ही नहीं गया था।
कोर्ट ने माना कि इससे छात्रों के सामने न्यायपालिका की नकारात्मक छवि प्रस्तुत हो सकती है। इसलिए ऐसे लोगों को भविष्य में पाठ्यक्रम निर्माण में शामिल करने का कोई कारण नहीं है।
सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वालों पर भी कार्रवाई
NCERT विवादित अध्याय मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट मीडिया पर गैरजिम्मेदाराना टिप्पणियां करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि ऐसी साइटों और संबंधित व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।