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Supreme Court’s stern remark: No one can intimidate the judiciary; notices issued to opposition leaders, including Rahul Gandhi.
नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त टिप्पणी की। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट को कोई डरा-धमका नहीं सकता। अदालत ने यह भी कहा कि वह देश में चल रहे घटनाक्रम से अनजान नहीं है और अदालत के भीतर तथा बाहर दिए जा रहे बयानों पर उसकी नजर है।इसी सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने एसआइआर से संबंधित याचिकाओं पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। वहीं, विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने और वहां कथित अव्यवस्था से जुड़े मामले में राहुल गांधी समेत कई नेताओं को भी नोटिस जारी किए गए।
सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि अगली तारीख पर याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण के बारे में सवाल किए जाएंगे। हालांकि, अदालत ने इस संबंध में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया।पीठ ने यह भी साफ किया कि याचिका पर नोटिस जारी करने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने उसमें लगाए गए आरोपों को स्वीकार कर लिया है या याचिकाकर्ता के पक्ष का समर्थन किया है। फिलहाल अदालत संबंधित पक्षों से जवाब मांग रही है।
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को 26 से अधिक याचिकाओं और अर्जियों पर एक साथ सुनवाई हुई। इनमें मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों के अलावा 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च का मामला भी शामिल था।भाजपा नेता गौरव भाटिया ने इस मार्च के तौर-तरीकों और अदालत परिसर के आसपास कथित नारेबाजी तथा अव्यवस्था का मुद्दा उठाया था। इस मामले में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा और अन्य संबंधित नेताओं को नोटिस जारी किए गए।गौरव भाटिया की ओर से दाखिल याचिका में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आसपास विरोध प्रदर्शन तथा जुलूस को नियंत्रित करने की मांग की गई है। याचिका में आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने समेत अन्य राहत देने का अनुरोध भी किया गया है।
राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया से संबंधित कथित खामियों को चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किया।सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिका के विभिन्न पहलुओं पर अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने बताया कि मामला मुख्य रूप से तीन मुद्दों से संबंधित है। इनमें चुनाव आयोग में धारा 18 के तहत सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया और फॉर्म-6 तथा फॉर्म-7 से जुड़े विषय शामिल हैं।दलीलें सुनने के बाद प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अदालत याचिका पर नोटिस जारी कर रही है, लेकिन इसके साथ ही एक अन्य पहलू पर भी विचार किया जाएगा। पीठ ने दोहराया कि नोटिस जारी करना किसी पक्ष के समर्थन या विरोध का संकेत नहीं है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने विपक्षी नेताओं के मार्च से संबंधित याचिका का उल्लेख किया। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिका में न्यायालयों के आसपास विरोध प्रदर्शन और जुलूसों को नियंत्रित करने की मांग की गई है। साथ ही, कथित अव्यवस्था के मामले में आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध भी किया गया है।सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अदालत ने अभी संबंधित याचिकाओं पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। नोटिस जारी होने के बाद अब संबंधित पक्षों के जवाब और आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी।