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Supreme Court takes a firm stand on the TMC election symbol dispute; asks the EC when the final decision will be made, citing the Shiv Sena case.
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अंतिम निर्णय के लिए स्पष्ट समयसीमा बताने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों को अपना पक्ष और साक्ष्य रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए, लेकिन प्रक्रिया अनिश्चित समय तक नहीं चल सकती। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े पुराने विवाद का हवाला देते हुए कहा कि उस मामले में देरी के परिणाम सामने आ चुके है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह बताने को कहा कि दोनों पक्षों को निष्पक्ष अवसर देने के बाद अंतिम सुनवाई और निर्णय पूरा करने में कितना समय लगेगा। आयोग को इस संबंध में समयसीमा बतानी है।
यह मामला तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो धड़ों के बीच नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। चुनाव आयोग ने सितंबर में अंतरिम आदेश जारी कर मूल पार्टी नाम और पारंपरिक 'फूल और घास' चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। इसके बाद दोनों धड़ों को अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए गए। ममता बनर्जी ने आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
उधर, नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर भी अदालत में सुनवाई हुई। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी से जुड़े पुराने मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी है। अदालत ने कहा कि 12 अक्टूबर तक उन्हें गिरफ्तार मानकर उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई नहीं की जाए। इस मामले में राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के एकल पीठ के आदेश को डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी है।
नंदीग्राम और अन्य उपचुनावों के बीच तृणमूल कांग्रेस के दूसरे धड़े को 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिए जाने का मामला भी कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा है। यह चिह्न पहले इंडियन सेक्युलर फ्रंट के इस्तेमाल में था। हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि यह चिह्न किस आधार पर दूसरे संगठन को आवंटित किया गया। अदालत ने आयोग से इस फैसले के कारण बताने को कहा है।
TMC के नाम और चुनाव चिह्न का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की अदालतों में भी अलग-अलग पहलुओं को लेकर सुनवाई का विषय बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य सवाल आयोग के अंतिम फैसले की समयसीमा से जुड़ा है, जबकि कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनाव चिह्न के आवंटन और नंदीग्राम उम्मीदवार से संबंधित मामलों पर सुनवाई चल रही है। आने वाले दिनों में इन मामलों की सुनवाई का असर उपचुनाव से जुड़ी चुनावी प्रक्रिया पर भी दिखाई दे सकता है।