

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Supreme Court takes a tough stand on NEET paper leaks, says irregularities will not stop without accountability
नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक मामले पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि जब तक जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि UPSC जैसे बड़े स्तर की परीक्षाएं कराने वाले संस्थान में कभी पेपर लीक नहीं हुआ, इसलिए NTA को उनसे सीखने की जरूरत है।
कोर्ट ने पूछा- सुधारों के बावजूद फिर कैसे हुआ पेपर लीक
सुनवाई के दौरान जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी के प्रमुख और पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के राधाकृष्णन से पूछा कि 2024 के पेपर लीक के बाद कई सिफारिशें लागू की गई थीं, फिर भी इस बार परीक्षा में गड़बड़ी कैसे हुई। कोर्ट ने कहा कि अगर सुधार लागू किए गए थे तो NEET-UG में दोबारा ऐसी स्थिति क्यों बनी।
इस पर राधाकृष्णन ने बताया कि समिति की अधिकांश सिफारिशें लागू कर दी गई हैं और आगामी री-एग्जाम से पहले सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।
PM मोदी खुद कर रहे निगरानी : तुषार मेहता
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद NEET पेपर लीक जांच की निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी स्तर पर कोई चूक न हो। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है और 21 जून को होने वाले री-एग्जाम के लिए नया सुरक्षा तंत्र तैयार किया गया है।
NTA को मजबूत संस्था बनाने की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NTA अभी स्थायी और मजबूत संस्था की तरह काम नहीं कर रही है। अदालत ने सुझाव दिया कि NTA को IITs और अन्य बड़े संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि संस्थाएं एड-हॉक तरीके से नहीं चल सकतीं और छात्रों की मेहनत व भावनाओं को देखते हुए उन्हें ऐसे मानसिक तनाव से बचाना जरूरी है।
21 जून को होगा री-एग्जाम
देशभर में 3 मई को NEET-UG परीक्षा आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 23 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। 7 मई को पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और अब 21 जून को री-एग्जाम कराया जाएगा। इस मामले की जांच CBI कर रही है और अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
कोर्ट रूम में क्या-क्या हुआ
जस्टिस नरसिम्हा ने पूछा- “अगर तैयारी थी तो पेपर लीक कैसे हुआ?” राधाकृष्णन ने कहा- “पेपर से छेड़छाड़ बड़ी चुनौती थी।” कोर्ट ने कहा- “UPSC में ऐसी स्थिति नहीं बनती, NTA को उससे सीखना चाहिए।” सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि री-एग्जाम के लिए हाई लेवल मॉनिटरिंग की जा रही है। कोर्ट ने IITs और बड़ी यूनिवर्सिटीज के विशेषज्ञों को जोड़ने की सलाह दी।
25 मई को भी कोर्ट ने लगाई थी फटकार
इससे पहले 25 मई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि NTA ने 2024 के पेपर लीक से कोई सबक नहीं लिया। अदालत ने NTA से हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा था कि पिछली सिफारिशों पर क्या कार्रवाई की गई।