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Why did the NCERT textbook controversy escalate? Why did Michel Danino's statement raise another big question?
नई दिल्ली। एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान पुस्तक को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। न्यायपालिका पर लिखे गए एक अध्याय को हटाए जाने के बाद अब राष्ट्रीय पाठ्यचर्या समूह के अध्यक्ष मिशेल डैनिनो के बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया है।
विवादित अध्याय को लेकर क्या है पूरा मामला
कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े एक अध्याय को लेकर आपत्ति के बाद उसे पाठ्यक्रम से हटा दिया गया था। इस फैसले के बाद शैक्षणिक और कानूनी हलकों में बहस तेज हो गई थी।
मिशेल डैनिनो ने क्या कहा और क्यों बढ़ी चर्चा
पद्मश्री से सम्मानित विद्वान मिशेल डैनिनो ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इस अध्याय को लेकर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अध्याय की सामग्री सही थी और वह आज भी अपने रुख पर कायम हैं।उनके अनुसार पाठ्यपुस्तक लेखन में रचनात्मकता और नवाचार बेहद जरूरी है और इस तरह के विवाद भविष्य के लेखकों को प्रभावित कर सकते हैं।
अध्याय हटाए जाने के बाद क्यों उठे शैक्षणिक स्वतंत्रता पर सवाल
डैनिनो ने चिंता जताई कि इस तरह के फैसलों से शिक्षकों और लेखकों में डर पैदा हो सकता है, जिससे वे नए विचार और प्रयोग करने से बचेंगे। उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और आगे की स्थिति क्यों बनी चर्चा का केंद्र
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेशों के बाद भी अलग अलग स्तर पर व्याख्या और प्रतिक्रिया देखने को मिली। बाद में कोर्ट ने अपने रुख में संशोधन करते हुए केंद्र और राज्यों को निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी है।
एनसीईआरटी और समितियों की भूमिका पर क्यों उठे सवाल
डैनिनो ने यह भी कहा कि पाठ्यपुस्तक की सामग्री केवल एनसीईआरटी ही नहीं बल्कि कई विशेषज्ञ समितियों द्वारा अंतिम रूप दी गई थी। उनके अनुसार प्रक्रिया में सभी स्तरों पर मंजूरी शामिल थी।
शिक्षा जगत में यह विवाद क्या संकेत दे रहा है
यह पूरा मामला अब केवल एक अध्याय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा नीति, शैक्षणिक स्वतंत्रता और पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया पर बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है। आने वाले समय में इस पर और स्पष्टता और चर्चा की संभावना बनी हुई है।