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Suspicious death of Tripura DGP Anurag Dhankhar sparks a stir; found hanging from a noose in the police headquarters washroom; magisterial inquiry ordered.
अगरतला। त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ (60) सोमवार को अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय में अपने चैंबर के वॉशरूम में फंदे से लटके मिले। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां दोपहर 12:48 बजे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस घटना से पुलिस महकमे और नौकरशाही में शोक और हड़कंप का माहौल है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने घटना पर दुख जताते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।
पोस्टमार्टम के बाद अनुराग धनखड़ का शव उनके परिजनों को सौंप दिया गया। अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित पैतृक निवास ले जाया जाएगा। परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा हैं, जो कनाडा में रहता है। घटना के समय उनकी पत्नी भी कनाडा में थीं।
नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने दावा किया कि अनुराग धनखड़ दबाव में थे। वहीं कांग्रेस विधायक सुदीप बर्मन ने कहा कि देश में पहली बार किसी डीजीपी रैंक के अधिकारी की अपने कार्यालय में इस तरह मौत हुई है। उन्होंने पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है।
1994 बैच के आईपीएस अनुराग धनखड़ ने तीन दशक से अधिक समय तक पुलिस सेवा में काम किया। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के मूल निवासी अनुराग की पारिवारिक जड़ें हरियाणा के झज्जर जिले से जुड़ी थीं। वे अपनी सादगी के लिए भी जाने जाते थे और आधिकारिक रिकॉर्ड व वर्दी पर केवल "अनुराग" नाम ही लिखते थे।
उन्होंने सीबीआई में पुलिस अधीक्षक, उप महानिरीक्षक, संयुक्त निदेशक और अतिरिक्त निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। इसके अलावा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में महानिरीक्षक (कार्मिक) भी रहे। उन्हें उत्कृष्ट सेवाओं के लिए तीन विशेष पदकों से सम्मानित किया गया था।
अनुराग धनखड़ ने कई चर्चित मामलों की जांच का नेतृत्व किया। उन्होंने नीरव मोदी बैंक घोटाले की सीबीआई जांच का नेतृत्व किया था। साथ ही 1984 के सिख विरोधी दंगों की विशेष जांच टीम (SIT) के अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
बेहतर कार्यशैली और साफ-सुथरी छवि के चलते उन्हें वर्ष 2025 में त्रिपुरा का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया था। उनका सेवानिवृत्ति का समय निकट होने के बावजूद उन्हें दो वर्ष का कार्यकाल दिया गया था। उन्होंने त्रिपुरा में विभिन्न पदों पर लगभग 16 वर्षों तक सेवाएं दीं और संयुक्त राष्ट्र के कोसोवो मिशन का भी हिस्सा रहे।
पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आत्महत्या सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
त्रिपुरा सरकार ने अनुराग धनखड़ के निधन पर 21 जुलाई को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाकर फहराया जाएगा और कोई भी सरकारी मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं होगा। राज्य मंत्रिमंडल ने उन्हें समर्पित, ईमानदार और दूरदर्शी अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके निधन से त्रिपुरा ने एक कुशल और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी को खो दिया है।