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The conflict in Hormuz escalates, the crisis deepens with the seizure of ships, and Trump extends the ceasefire.
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने का ऐलान किया, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को रोककर हालात को और जटिल बना दिया है।
भारत आ रहे जहाज पर भी कार्रवाई, वैश्विक चिंता बढ़ी
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज से गुजर रहे तीन जहाजों को निशाना बनाया, जिनमें से दो को जब्त कर लिया गया। इनमें एक कंटेनर जहाज लाइबेरिया के झंडे वाला था, जो भारत के गुजरात की ओर आ रहा था। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
ट्रम्प का यू टर्न, डेडलाइन से पहले बढ़ाया युद्धविराम
बीते 54 दिनों से जारी इस संघर्ष में ट्रम्प का रुख लगातार बदलता नजर आ रहा है। पहले उन्होंने युद्धविराम बढ़ाने से इनकार किया, लेकिन अंतिम समय में इसे अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही वार्ता को लेकर सकारात्मक खबर सामने आ सकती है।
ईरान का सख्त रुख, वार्ता पर अभी फैसला नहीं
दूसरी ओर ईरान ने साफ कर दिया है कि अगले दौर की बातचीत में शामिल होने को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है।
नई रणनीति पर अमेरिका, सैन्य से ज्यादा आर्थिक दबाव की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब सीधे युद्ध के बजाय आर्थिक दबाव की रणनीति पर काम कर रहा है। योजना के तहत होर्मुज में नाकाबंदी कर ईरान के रोजाना करीब पांच लाख बैरल तेल निर्यात को रोकने की कोशिश की जा सकती है। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
होर्मुज बना सबसे बड़ा जोखिम क्षेत्र, ईरानी ताकत बनी चुनौती
होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग बन चुका है। यहां ईरान की तेज रफ्तार अटैक बोट्स अमेरिकी युद्धपोतों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये छोटी बोट्स अचानक हमला कर सकती हैं और इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर, उड़ानें रद्द और महंगाई बढ़ी
इस टकराव का असर अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। जर्मनी की एयरलाइन Lufthansa ने जेट फ्यूल की कमी के चलते मई से अक्टूबर के बीच करीब 20 हजार उड़ानें रद्द करने का फैसला लिया है। वहीं यूरोप में ऊर्जा खर्च बढ़ गया है और महंगाई दर भी ऊपर जा रही है।
आगे क्या, दुनिया की नजर वार्ता और फैसलों पर टिकी
अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव अब केवल सैन्य नहीं बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चों पर भी फैल चुका है। आने वाले दिनों में बातचीत होती है या तनाव और बढ़ता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।