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The pace of enrolling young voters has accelerated, with over 50,000 names being added daily; the total count has reached 17.38 crore following the SIR
नई दिल्ली। देश में युवा मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने के लिए चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे अभियानों के बीच मतदाता सूची में युवाओं के नाम जुड़ने की रफ्तार बढ़ी है। आयोग के आंकड़ों के अनुसार, हर दिन औसतन 50 हजार से अधिक युवा मतदाताओं के नाम सूची में शामिल हो रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जो पहली बार मतदान के लिए पात्र बने हैं।आयोग के अनुसार जून 2025 में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया शुरू होने से पहले 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के करीब 14.50 करोड़ मतदाता सूची में दर्ज थे। अब यह संख्या बढ़कर 17.38 करोड़ हो गई है। यानी इस आयु वर्ग में करीब 2.88 करोड़ नाम बढ़े हैं।
चुनाव आयोग का जोर उन युवाओं को समय पर मतदाता सूची में शामिल करने पर है, जिन्होंने 18 वर्ष की उम्र पूरी कर ली है। आयोग ऐसे संभावित मतदाताओं की पहले से पहचान और मैपिंग करने की प्रक्रिया पर भी काम कर रहा है, ताकि पात्रता की उम्र पूरी होते ही उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जा सके।इस व्यवस्था का उद्देश्य नए मतदाताओं को आवेदन और पंजीयन की प्रक्रिया में होने वाली देरी से बचाना है। आयोग के आंकड़ों के अनुसार हर महीने करीब 16 लाख युवा मतदाता सूची में जुड़ रहे हैं।
युवाओं में मतदान और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए देशभर में मतदाता साक्षरता क्लब यानी ELC को सक्रिय किया जा रहा है। आयोग का लक्ष्य इस साल के अंत तक करीब 10 लाख मतदाता साक्षरता क्लबों को सक्रिय करने का है।योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 10 ELC सक्रिय करने का लक्ष्य रखा गया है। इन क्लबों के माध्यम से युवाओं को मतदाता बनने की पात्रता, पंजीयन प्रक्रिया, मतदान के महत्व और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी बुनियादी जानकारी दी जा रही है।
युवा मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार राज्यों का दौरा कर युवाओं से संवाद कर रहे हैं। आयोग की कोशिश है कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी केवल चुनाव के समय तक सीमित न रहे, बल्कि युवाओं को लगातार नागरिक भागीदारी के लिए तैयार किया जाए।
युवा मतदाताओं के पंजीयन के आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने हाल में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया था कि 2024 के बाद युवा मतदाताओं, खासकर Gen-Z को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में रोक या देरी की गई।चुनाव आयोग की ओर से उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि SIR शुरू होने के बाद 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग में मतदाताओं की संख्या 14.50 करोड़ से बढ़कर 17.38 करोड़ हुई है। ये आंकड़े युवा मतदाताओं के पंजीयन की स्थिति पर आयोग के आधिकारिक पक्ष को सामने रखते हैं। राजनीतिक दलों के आरोप और आयोग के आंकड़े अलग-अलग दावों को दर्शाते हैं, जिनका आकलन संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और निर्वाचन प्रक्रिया के संदर्भ में किया जाना है।