

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

The recitation of 'Saraswati Vandana' and mantras during morning assemblies in government schools will continue; the High Court has dismissed the petition.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र, शांति मंत्र और भोजन मंत्र के अनिवार्य वाचन को लेकर चल रहे विवाद पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए सरकार के निर्देशों को बरकरार रखा है। इसके साथ ही सरकारी विद्यालयों में मौजूदा व्यवस्था के तहत प्रार्थना और मंत्रोच्चार पहले की तरह जारी रहेगा।
स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों में प्रतिदिन प्रार्थना सभा के दौरान सरस्वती वंदना और निर्धारित मंत्रों का वाचन अनिवार्य किया था। इस आदेश को अब्दुल सलाम रिजवी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में मांग की गई थी कि इस आदेश को असंवैधानिक घोषित करते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि सरकारी वित्तपोषित शिक्षण संस्थानों में धार्मिक अनुष्ठान या धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती। उनका कहना था कि यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 25 और अनुच्छेद 28 की भावना के विपरीत है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि विद्यालय वैज्ञानिक सोच विकसित करने के केंद्र होने चाहिए, किसी विशेष धार्मिक परंपरा के प्रचार का माध्यम नहीं।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की सभी आपत्तियों और मांगों को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का आदेश प्रभावी रहेगा और सरकारी स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान सरस्वती वंदना तथा निर्धारित मंत्रों का वाचन जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य शिक्षा को केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने वाला है और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई मजबूती देगा।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि उच्च न्यायालय का फैसला सरकार की पहल की वैधानिक पुष्टि है। उनके अनुसार विद्यालयों में प्रार्थना और मंत्रोच्चार का उद्देश्य किसी धर्म विशेष का प्रचार करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में एकाग्रता, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आगे भी मूल्यपरक और संस्कारयुक्त शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।