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Three medical colleges in Chhattisgarh accused of collecting ₹360 crore; students yet to receive refunds even after a year
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है, कि निजी कॉलेजों में इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस बीच में नहीं बढ़ाई जा सकती। वहीं, राज्य शासन के आदेश और कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद एक वर्ष से ज्यादा समय होने के बाद भी तीन निजी मेडिकल कॉलेजों ने विद्यार्थियों से वसूली गई अतिरिक्त राशि नहीं लौटाई है।
यह राशि करीब 360 करोड़ रुपये है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ के तीन मेडिकल कॉलेजों शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, भिलाई, रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस और बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के खिलाफ पुलिस कमिश्नर से शिकायत कर अपराध दर्ज करने और जांच की मांग की गई है।
आपको बता दें, कि तीनों निजी मेडिकल कॉलेजों ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 से 2024-25 के दौरान निर्धारित 7.45 लाख से 7.99 लाख रुपये की ट्यूशन फीस के अलावा हॉस्टल और परिवहन के नाम पर प्रत्येक विद्यार्थी से पांच-पांच लाख रुपये से अधिक की राशि वसूली थी। इन कॉलेजों में छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश व अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी शामिल हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग और प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति यानि एफआरसी ने प्रत्येक विद्यार्थी को 4.58 लाख रुपये एक माह में लौटाने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही प्रत्येक कॉलेज पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इस संबंध में शासन ने इन कॉलेजों को निर्देशित किया था, कि एक माह के भीतर राशि वापस नहीं करने पर कॉलेजों को सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ विद्यार्थियों को राशि लौटानी पड़ेगी। इसके साथ ही इन कॉलेजों को मान्यता रद करने की चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन राज्य शासन के आदेश के एक साल बीत जाने के बाद भी अभी तक ये राशि विद्यार्थियों को वापस नहीं की गई है।
इस संबंध में प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति के चेयरमैन डॉक्टर शिवकुमार पांडे ने कहा कि मामले की दोबारा जांच कराई जाएगी।