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Toll Plaza Free: No more long queues of vehicles at toll plazas; toll tax will be deducted without stopping.
नई दिल्ली। लंबे सफर के दौरान टोल प्लाजा पर लगने वाली गाड़ियों की लंबी कतार जल्द ही बीते दिनों की बात हो सकती है। केंद्र सरकार देशभर के नेशनल हाईवे पर टोल कलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह बैरियर-फ्री बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि मार्च 2027 तक देश के सभी टोल प्लाजा को बैरियर-फ्री करने का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में बताया कि सरकार नेशनल हाईवे के सभी टोल बूथ पर बैरियर-फ्री सिस्टम लागू करने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत दिसंबर 2026 के अंत तक 70 फीसदी से ज्यादा टोल बूथ बैरियर-फ्री किए जाने का लक्ष्य है।
इसके बाद मार्च 2027 तक देश के सभी टोल प्लाजा को इस नए सिस्टम से जोड़ने की योजना है। इसका सबसे बड़ा फायदा हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों को मिलेगा, जिन्हें टोल पर रुककर लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
नए सिस्टम में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। हाईटेक कैमरों की मदद से टोल जोन से गुजरने वाली गाड़ियों की नंबर प्लेट अपने आप स्कैन होगी।
वाहन के टोल जोन से गुजरते ही सिस्टम उसकी पहचान करेगा और उससे जुड़े अकाउंट से निर्धारित टोल राशि काट ली जाएगी। यानी वाहन को टोल बैरियर पर रुकने की जरूरत नहीं होगी।
मौजूदा व्यवस्था में टोल प्लाजा पर वाहनों को कई बार कतार में खड़ा होकर इंतजार करना पड़ता है। गडकरी के मुताबिक, पहले एक वाहन को टोल प्लाजा पर औसतन करीब 12 मिनट तक रुकना पड़ता था।
बैरियर-फ्री सिस्टम लागू होने के बाद यह इंतजार लगभग खत्म हो जाएगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होने की उम्मीद है।
टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने और दोबारा चलने से ईंधन की खपत भी बढ़ती है। नए फ्री-फ्लो सिस्टम से वाहनों को लगातार चलने की सुविधा मिलेगी।
सरकार के अनुमान के मुताबिक, टोल प्लाजा पर वाहनों के नहीं रुकने से हर साल करीब 5,250 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत हो सकती है। इसका सीधा फायदा वाहन चालकों और आम जनता को मिलेगा।
नई टोलिंग तकनीक से सरकार के राजस्व में भी बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। गडकरी के अनुसार, फास्टैग के इस्तेमाल से टोल कलेक्शन में पहले ही करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और सरकार को लगभग 7,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिला है।
देश का कुल टोल रेवेन्यू अब 82,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। नए सिस्टम के पूरी तरह लागू होने के बाद सरकार को हर साल करीब 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फायदा होने का अनुमान है।
टोल कलेक्शन को डिजिटल बनाने में FASTag की अहम भूमिका रही है। सरकार के मुताबिक, देश में अब तक 13 करोड़ से ज्यादा FASTag जारी किए जा चुके हैं।
अब FASTag के साथ ANPR तकनीक को जोड़कर टोल कलेक्शन को और अधिक तेज और ऑटोमेटिक बनाने की तैयारी है।
बैरियर-फ्री टोलिंग के लिए सरकार मल्टी-लेन फ्री-फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस व्यवस्था में पारंपरिक टोल बैरियर नहीं होंगे। जब कोई वाहन टोल जोन से गुजरेगा, तो वहां लगे कैमरे उसकी नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे। सिस्टम वाहन की पहचान करने के बाद उससे जुड़े भुगतान माध्यम से टोल राशि वसूल करेगा। इस तरह वाहन को रोकने, लाइन में खड़े होने या टोल बूथ पर इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
मल्टी-लेन फ्री-फ्लो टोलिंग सिस्टम का परीक्षण 11 मई 2026 को मुंबई के एक टोल प्लाजा पर किया जा चुका है। सरकार अब इसके अनुभव और तकनीकी व्यवस्था के आधार पर इसे देश के अन्य नेशनल हाईवे टोल प्लाजा तक विस्तार देने की तैयारी कर रही है।
- टोल प्लाजा पर लंबी लाइन से राहत
- बिना रुके टोल भुगतान
- सफर का समय बचेगा
- ईंधन की खपत कम होगी
- ट्रैफिक जाम में कमी आएगी
- टोल कलेक्शन ज्यादा तेज और पारदर्शी होगा