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Trump eyes voter data ahead of US midterm elections; requests voter lists from 30 states
न्यूयॉर्क। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव की तैयारियों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से मतदाता सूचियों को लेकर उठाए गए कदम पर बहस तेज हो गई है। खबर के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ने 50 में से 30 राज्यों से वोटर लिस्ट मांगी है। इस सिलसिले में राज्यों के साथ सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया गया है।मांगे गए रिकॉर्ड में मतदाताओं के पते, जन्मतिथि और सोशल सिक्योरिटी नंबर जैसी संवेदनशील निजी जानकारियां शामिल बताई गई हैं। आलोचकों को आशंका है कि इस डेटा का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों के समर्थकों की पहचान करने और उन पर दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, इन आशंकाओं और डेटा के संभावित इस्तेमाल को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के दौरान प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों और 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए चुनाव होने हैं। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी के पास कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत है।
चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान होने पर ट्रम्प राष्ट्रपति पद पर बने रहेंगे, लेकिन कांग्रेस में बहुमत कमजोर होने से उनकी नीतियों को आगे बढ़ाने में मुश्किलें आ सकती हैं। टैरिफ, वीजा और इमिग्रेशन जैसे मुद्दों पर फैसले लेने के लिए उन्हें विपक्ष के साथ बातचीत और संसदीय समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति को 'लेम डक' यानी सीमित राजनीतिक प्रभाव वाला नेता कहा जाता है।
यदि डेमोक्रेटिक पार्टी को कांग्रेस में बहुमत मिलता है, तो वह ट्रम्प प्रशासन के फैसलों पर ज्यादा प्रभावी तरीके से सवाल उठा सकती है। डेमोक्रेट नेता पहले भी ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की संभावना पर चर्चा कर चुके हैं। हालांकि, महाभियोग की प्रक्रिया और उसके नतीजे कांग्रेस में संख्या बल तथा राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे।
चुनाव में अपेक्षित नतीजे नहीं मिलने पर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ट्रम्प के नेतृत्व को लेकर सवाल उठ सकते हैं। निक्की हेली जैसे नेता और पार्टी के अन्य असंतुष्ट धड़े अपनी राजनीतिक भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं। उद्योगपति एलन मस्क जैसे प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी पार्टी की आगे की रणनीति में चर्चा का विषय बन सकती है।
2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प को ग्रामीण इलाकों के श्वेत मतदाताओं और हिस्पैनिक समुदाय के एक हिस्से का समर्थन मिला था। मौजूदा राजनीतिक माहौल में इन मतदाता समूहों के रुझान को लेकर चर्चा हो रही है। मिडटर्म चुनाव में इन वर्गों का मतदान व्यवहार रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।