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US-Iran War: Ceasefire broken within 20 days; hostilities flare up again. Iran retaliates following a major US airstrike; global crisis escalates over Hormuz.
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। करीब 20 दिन पहले लागू हुआ अमेरिका-ईरान युद्धविराम टूटने के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई दोबारा तेज हो गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम समाप्त करने की घोषणा कर दी। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जबकि ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।
तुर्किये में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शांति स्थापित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन अब आगे बातचीत का कोई औचित्य नहीं बचा है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ईरान अपनी गतिविधियां नहीं रोकता, तो उसे और कड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी सेना ने बुधवार तड़के ईरान के प्रमुख बंदरगाह बंदर अब्बास सहित लगभग 80 ठिकानों पर हवाई हमले किए। रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा, आठ सैनिकों की मौत हुई और बड़ी संख्या में सैन्य नौकाएं नष्ट हो गईं।
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन दागे। कई स्थानों पर हमले किए गए, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्क कर दी गई।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उस पर सैन्य दबाव जारी रहा तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रोक सकता है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। ईरान ने जहाजों के लिए नए समुद्री मार्ग का भी संकेत दिया है, जबकि कुछ जहाज ओमान की ओर से वैकल्पिक रास्ता अपना रहे हैं।
तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका ने ईरान को कच्चा तेल बेचने की दी गई छूट वापस ले ली है। इससे पहले विशेष व्यवस्था के तहत ईरान को डॉलर के बदले तेल निर्यात की अनुमति मिली थी। अब इस फैसले के बाद ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री अधिकारियों के अनुसार होर्मुज क्षेत्र में लगभग 350 जहाज और तेल टैंकर फंसे हुए हैं, जिन पर करीब छह हजार चालक दल के सदस्य मौजूद हैं। समुद्री यातायात प्रभावित होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि होर्मुज क्षेत्र के आसपास मौजूद भारत के नौ जहाज और उन पर सवार 198 भारतीय चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक कदम उठा रही है।