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दुर्ग पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। दुर्ग-भिलाई के नेहरू नगर में दिनदहाड़े हुई एक हाई-प्रोफाइल चोरी के मामले का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने एक अंतरराज्यीय चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मेरठ से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें चोरी की ज्वेलरी खरीदने वाला एक सुनार भी शामिल है।
इस पूरी कार्रवाई में पुलिस ने लगभग 400 ग्राम सोना (कीमत ₹60 लाख) और ₹3,50,000 नगद बरामद किया है। बरामद किए गए कुल मशरूके की कीमत ₹63,50,000 आंकी गई है। इस गिरोह की गिरफ्तारी से दुर्ग, भिलाई, नवा रायपुर, बिलासपुर और मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुई कई बड़ी चोरियों का खुलासा हुआ है।

दुर्ग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) विजय अग्रवाल ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि नेहरू नगर में एक व्यवसायी के सूने मकान में दिनदहाड़े चोरी हुई थी। चोरों ने इस पूरी वारदात को महज 53 मिनट के भीतर अंजाम दिया था। घटना पूरी तरह 'ब्लाइंड' थी और पुलिस के पास कोई सुराग नहीं था। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सुपेला और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की एक विशेष संयुक्त टीम का गठन किया गया।
पुलिस टीम ने घटना स्थल से लेकर आरोपियों के भागने के रूट का तकनीकी विश्लेषण किया। टीम सुराग तलाशते हुए नेहरू नगर से कोसानाला, सुपेला थाना, पावर हाउस चौक, चरौदा, कुम्हारी और फिर रायपुर के टाटीबंध व जयस्तंभ चौक तक पहुंची। लगातार 300 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पुलिस को पुख्ता सुराग मिला कि आरोपी रायपुर के मौदहापारा में रुके थे। इसके बाद पुलिस टीम आरोपियों का पीछा करते हुए बिलासपुर, भोपाल और अंततः उत्तर प्रदेश के मेरठ तक जा पहुंची।

पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है:
1. हासीम खान (उम्र 24 वर्ष): पिता जब्बार खान, निवासी- श्याम नगर रोड, शालीमार गार्डन, मेरठ (उ०प्र०)। यह इस गिरोह का मुख्य शातिर चोर है, जिसका भाई यूपी में गैंगस्टर एक्ट के तहत जेल में बंद है। हासीम खुद भी पहले चोरी के मामलों में जेल जा चुका है।
2. सलीम खान (उम्र 28 वर्ष): पिता अब्बास खान, निवासी- शिवालकास, मेरठ (उ०प्र०)। यह 'सलीम ज्वेलर्स' का संचालक है, जो चोरी का सोना खरीदता था।
गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर कैंप कर रही हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासा किया, वह बेहद चौंकाने वाला है। आरोपी छत्तीसगढ़ के शहरों में अपनी पहचान छिपाकर मौदहापारा (रायपुर) में किराए का मकान लेकर रहते थे। वे दिन के समय शहरों में फेरीवाले बनकर कपड़ा और गलीचा (कंबल) बेचने के बहाने रेकी करते थे।
आरोपियों का मुख्य टारगेट नेहरू नगर जैसे पॉश इलाके होते थे, जहां संपन्न लोग रहते हैं। फेरी लगाने के दौरान वे ऐसे मकानों को चिन्हित करते थे जिनके मेन गेट पर ताला लटका होता था। वारदात के वक्त गिरोह का एक सदस्य घर के बाहर खड़े होकर रेकी (निगरानी) करता था, जबकि दूसरा सदस्य ताला तोड़कर तुरंत अंदर घुस जाता था और महज कुछ ही मिनटों में सोना और कैश समेटकर रफूचक्कर हो जाते थे। चोरी को अंजाम देने के लिए इन्होंने बिलासपुर से एक एक्टिवा (CG 10 AK 4136) भी खरीदी थी।
SSP विजय अग्रवाल ने बताया कि मेरठ से बरामद किया गया 400 ग्राम सोना गली हुई अवस्था में मिला है। आरोपी चोरी के जेवरातों को सीधे सलीम ज्वेलर्स को बेच देते थे। पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने मार्केट में कुछ कर्ज ले रखा था, जिसे चुकाने के लिए वे इस चोरी के सोने का इस्तेमाल कर रहे थे।
जब पुलिस से पूछा गया कि क्या ये लोग गोल्ड लोन कंपनियों (जैसे मुथूट या मणप्पुरम) में भी सोना गिरवी रखते थे, तो अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस मामले में ऐसा कोई एंगल सामने नहीं आया है। हालांकि, पुलिस ने पहले ही सभी फाइनेंस कंपनियों को सख्त हिदायत और नोटिस जारी किया है कि वे बिना उचित ऑथेंटिकेशन और रसीद के कोई भी गोल्ड स्वीकार न करें।
पुलिस दोनों आरोपियों को उत्तर प्रदेश से ट्रांजिट रिमांड पर दुर्ग लेकर आई है। आरोपियों से सख्ती से पूछताछ करने और गिरोह के अन्य सदस्यों व अन्य चोरियों के माल की बरामदगी के लिए पुलिस न्यायालय से उनकी पुलिस रिमांड (PR) लेने जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं।