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Entertainment: Vijay and Rashmika turned out to be real-life heroes, not just reel heroes; they even included orphans in their wedding celebrations.
मुंबई। एक ऐसे दौर में, जब सेलिब्रिटी शादियां अक्सर सिर्फ भव्यता और चर्चा का केंद्र बनती हैं, विजय देवरकोंडा-रश्मिका मंदाना शादी ने एक अलग पहचान बनाई। यह आयोजन केवल आलीशान जश्न तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें परंपरा, समाजसेवा और सांस्कृतिक मूल्यों का खूबसूरत मेल देखने को मिला। इस शादी ने दिखाया कि बड़ा समारोह भी सार्थक, संवेदनशील और समाज से जुड़ा हो सकता है।
अन्नदान और प्रशंसकों के साथ खुशी साझा
इस शादी की सबसे खास बात अन्नदान रही, जो भारतीय परंपरा में सेवा, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। जोड़े ने अपनी खुशियों को सिर्फ मेहमानों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचाया। इसके अलावा, हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरु समेत 20 से अधिक शहरों में मिठाइयां बांटकर प्रशंसकों को भी इस जश्न का हिस्सा बनाया गया। यही नहीं, 200 प्रशंसकों के लिए विशेष भोजन का आयोजन कर उनसे व्यक्तिगत मुलाकात और उन्हें स्वयं परोसना इस समारोह को और भी यादगार बना गया।
शिक्षा, विरासत और जड़ों से जुड़ाव
विजय देवरकोंडा-रश्मिका मंदाना शादी सिर्फ वर्तमान का उत्सव नहीं थी, बल्कि भविष्य में निवेश का संदेश भी देती है। इस खास मौके पर तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा की गई, जो शिक्षा और सशक्तिकरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दिखाती है। वहीं, मंदिरों से प्रेरित सजावट, मिट्टी के रंग, फूलों से सजे मंडप और पारंपरिक परिधानों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को खूबसूरती से उभारा। इसके साथ ही, विजय के पैतृक गांव में पूजा और परिवार व प्रशंसकों से मुलाकात ने इस आयोजन को और अधिक आत्मीय बना दिया।