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Vistara fined for delaying a judge on a flight; airline slapped with a penalty of ₹1 lakh.
रायपुर: कन्फर्म टिकट होने के बावजूद एक अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश (ADJ) को फ्लाइट में सवार होने से रोकना विस्तारा एयरलाइंस को भारी पड़ गया है। जिला उपभोक्ता विवाद परितोष आयोग की रायपुर अतिरिक्त पीठ ने इसे 'अनुचित व्यापार व्यवहार' (Unfair Trade Practice) माना है। आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए विस्तारा एयरलाइंस पर 1 लाख रुपये का जुर्माना (क्षतिपूर्ति) लगाया है। इसके साथ ही कंपनी को 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा।
45 दिन के अंदर भुगतान करने का आदेश
मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस ने एयरलाइंस की दलीलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। आयोग का स्पष्ट कहना है कि कन्फर्म टिकट होने के बावजूद किसी यात्री को बोर्डिंग से रोकना उसके अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
आयोग ने विस्तारा एयरलाइंस को आदेश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर पीड़ित को 1 लाख रुपये क्षतिपूर्ति और 10 हजार रुपये वाद व्यय का भुगतान करे। यदि निर्धारित अवधि (45 दिन) के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो एयरलाइंस को 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला कांकेर में पदस्थ एडीजे (ADJ) भूपेंद्र कुमार वासनीकर का है। मई 2023 में वे अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ कश्मीर से लौट रहे थे। 28 मई को उनके पास दिल्ली से रायपुर के लिए विस्तारा एयरलाइंस की कन्फर्म टिकट थी।
उड़ान से ठीक एक घंटे पहले एयरलाइंस प्रबंधन ने 'ओवरबुकिंग' का हवाला देते हुए पहले तो पूरे परिवार को बोर्डिंग से रोक दिया। इसके बाद काफी मान-मनौव्वल के बाद एयरलाइंस ने परिवार के तीन सदस्यों (पत्नी और बच्चों) को तो यात्रा की इजाजत दे दी और उन्हें फ्लाइट से रायपुर भेज दिया, लेकिन एडीजे भूपेंद्र कुमार वासनीकर को दिल्ली में ही रुकना पड़ा।
एयरलाइंस ने दी 'ओवरबुकिंग' की दलील
अगले दिन एडीजे वासनीकर ने इंडिगो एयरलाइंस से 18,823 रुपये की टिकट ली और रायपुर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान विस्तारा एयरलाइंस ने अपना बचाव करते हुए दलील दी कि 'ओवरबुकिंग' एक सामान्य प्रक्रिया है और इसके बदले उन्होंने पीड़ित को टिकट राशि का चार गुना मुआवजा भी दिया था। हालांकि, आयोग ने इस दलील को अमान्य करते हुए यात्री के मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए एयरलाइंस को ही दोषी ठहराया।