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Whether circumstances are favorable or adverse, Swayamsevaks must not waver in their resolve to serve the nation: Mohan Bhagwat.
संबलपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों से परिस्थितियों की परवाह किए बिना राष्ट्रसेवा और समाजहित के कार्यों में निरंतर जुटे रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के रास्ते में कई बार चुनौतियां आती हैं, लेकिन निष्ठा, अनुशासन और सेवा भावना के साथ संगठन का काम आगे बढाते रहना चाहिए। रविवार को ओडिशा के संबलपुर में आयोजित संगठनात्मक बैठक में संघ के विस्तार और शताब्दी वर्ष की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
धनुपाली स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक बैठक आयोजित की गई। इसमें पश्चिम और पूर्व ओडिशा प्रांत के 11 विभागों से प्रमुख कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान संगठन की आगामी कार्ययोजना, शाखाओं के विस्तार और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संपर्क मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ। शताब्दी वर्ष के निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कार्यकर्ताओं की भूमिका और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा भी चर्चा का हिस्सा रही।
अपने संबोधन में डॉ. भागवत ने स्वयंसेवकों को सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। उन्होंने निःस्वार्थ भाव से काम करने, संगठन के प्रति निष्ठा बनाए रखने और समाज के बीच सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया। उनके अनुसार, परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, राष्ट्र और समाज के लिए किए जाने वाले कार्यों में निरंतरता जरूरी है। स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता और सेवा भावना संगठन की गतिविधियों को आगे बढाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
संघ प्रमुख ने पश्चिम बंगाल के बर्द्धमान स्थित मध्य बंग प्रांत कार्यालय में आयोजित एक अन्य बैठक में संगठन के विस्तार को लेकर कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश दिए। संघ सूत्रों के अनुसार, उन्होंने प्रत्येक स्वयंसेवक को हर साल कम से कम एक नया स्वयंसेवक तैयार करने का सुझाव दिया। साथ ही नियमित शाखा में भागीदारी और संगठन की गतिविधियों को व्यापक बनाने पर बल दिया।जानकारी के मुताबिक, भागवत गुरुवार को बर्द्धमान पहुंचे थे। वहां उन्होंने पूर्व और पश्चिम बर्द्धमान के एक हजार से अधिक मुख्यशिक्षकों तथा उनसे वरिष्ठ दायित्वधारी स्वयंसेवकों के साथ चर्चा की। बैठक में संगठन की मजबूती, नियमित सहभागिता और नए लोगों को जोडने के तरीकों पर विचार किया गया।