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Who is Haldwani's DM Vandana Singh? Who broke the courage of the rioters
रायपुर। देवभूमि उत्तराखंड में पहाड़ों के बीच बसे हल्द्वानी (Haldwani Violence) की शांति को विशेष समुदाय के लोगों ने भंग कर दी। बीते गुरूवार कथित डरे समुदाय के लोगों ने हल्द्वानी की सड़कों पर हिंसा और तबाही मचाई। चारों तरफ आग, पथराव, हिंसा फैलाई। पुलिसकर्मियों पर हमला, पत्थरबाजी और पेट्रोल बम से हमले किये। इसमें करीब 6 लोगों की मौत हो गई। वही 100 से ज्यादा लोग जख्मी हुए। विशेष समुदाय के फैलाए तबाही के बीच कर्फ्यू लगाया गया। इंटरनेट बंद करना पड़ा। लेकिन इन सब के बीच हल्द्वानी में माहौल को काबू करने के लिए डीएम वंदना सिंह (DM Vandana Singh) के एक्शन की चर्चा हर तरफ हो रही है।
दरअसल 8 फरवरी को प्रशासन की टीम अवैध जमीन पर बने मदरसे और नमाज स्थल को ढहाने गई थी। लेकिन इस दौरान पहले से घात लगाए विशेष समुदाय के लोगों ने पुलिस टीम पर हमला बोल दिया। उनपर पेट्रोल बम, पत्थर बरसाए गए। चारों ओर से पत्थरबाजी की जाने लगी। गाड़ियों में आग लगा दी गई। इसके बाद उपद्रवी थाने पहुंच गए और पेट्रोल बम से हमला कर दिया। पूरे मामले पर डीएम वंदना सिंह (DM Vandana Singh) ने कहा कि थाने पर हमला कर अधिकारियों को जिंदा जलाने की कोशिश की गई। हालात ऐसे बिगड़े कि उपद्रव मचाने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। दंगाइयों (Haldwani Violence ) पर एक्शन लेने वाली डीएम वंदना सिंह की पहचान सख्त ऑफिसर के तौर पर है। आइए डीएम वंदना के करियर पर एक नजर डालते हैं।
कौन है डीएम वंदना सिंह?
वंदना सिंह का जन्म हरियाणा के नसरूल्लागढ़ में हुआ था। उनका परिवार लड़कियों की शिक्षा के विषय में रूढ़िवादी था। इसके बावजूद उन्होंने उन्होंने पढ़ाई की। अपनी शुरूआती शिक्षा होमटाउन से की। परिवार को बेटी के अधिक पढ़ने पर भी शिकायत थी, लेकिन उनके पिता महिपाल सिंह चौहान ने उन्हें मुरादाबाद स्थित गुरूकुल में भेज दिया, जहां से उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की।
स्कूली शिक्षा ख़त्म करने के बाद उन्होंने आगरा के डॉ बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी में LLB में एडमिशन लिया। परिवार से अधिक सहयोग ना मिलने पर वो घर से ही पढ़ाई करती थीं। ऑनलाइन बुक्स मंगाकर उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया और फिर सिविल सर्विस की तैयारी में लग गईं।
पहले प्रयास में बनी टॉपर
वंदना सिंह ने घर में रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। वंदना सिंह ने तैयारी के लिए कोई कोचिंग नहीं ली। वह दिन में 12 से 14 घंटे पढ़ाई करती थीं। साल 2012 में अपने पहले ही प्रयास में वंदना ने यूपीएससी प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू राउंड पास कर लिया। उन्हें इस परीक्षा में रैंक 8 प्राप्त हुआ और वो IAS अधिकारी बन गईं। एक इंटरव्यू के दौरान वंदना की मां मिथिलेश ने कहा था, गर्मियों में भी उसने अपने कमरे में कूलर नहीं लगने दिया। क्योंकि वह कहती थीं कि कमरे में ठंडक होने से नींद आती है।
आईएएस वंदना सिंह चौहान को उत्तराखंड कैडर मिला। पिथौरागढ़ की मुख्य विकास अधिकारी के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई। वर्ष 2017 में वे जिले की पहली महिला सीडीओ बनी। वर्ष 2020 तक उनकी तैनाती पिथौरागढ़ में रही। इस दौरान उन्होंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर भी रहीं। 17 मई 2023 को नैनीताल की 48वीं डीएम के पद पर तैनाती के बाद वे इस पद पर बनी हुई है।