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Working professionals in Chhattisgarh will no longer be able to pursue law studies.
शासकीय या निजी संस्थानों में नौकरी करने वाले अधिकारी और कर्मचारी अब नौकरी के साथ-साथ कानून की पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के सचिव श्रीमंतो सेन ने इस संबंध में लॉ कॉलेजों और कुलपतियों को पत्र जारी कर फर्जी उपस्थिति (प्रोक्सी अटेंडेंस) या नौकरीपेशा लोगों के लिए बनाए गए पाठ्यक्रम को तत्काल बंद करने के लिए कहा है। बीसीआई ने स्पष्ट किया है, कि विधि शिक्षा प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे और सप्ताह में 30 घंटे का पूर्णकालिक पाठ्यक्रम है, जिसका कड़ाई से पालन अनिवार्य है। बीसीआई का यह सुझाव वर्तमान शैक्षणिक सत्र से लागू होगा।
इस आदेश से आइएएस, आपीएस सहित केंद्रीय एवं राज्य की सेवाओं के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नौकरी के साथ-साथ कानून की डिग्री की पढ़ाई व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगी। निजी क्षेत्रों में काम करने वाले लोग भी इस आदेश से प्रभावित होंगे।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक प्रकरण की सुनवाई के दौरान विधि शिक्षा के गिरते स्तर पर की गई गंभीर टिप्पणियों के बाद बीसीआई ने यह कदम उठाया है। बीसीआई ने यह स्पष्ट किया है, कि केवल विश्वविद्यालय से संवद्ध्ता होना ही काफी नहीं है। रुल्स ऑफ लीगल एजुकेशन 2008 के नियम 14 के तहत बीसीआई से अलग से रिपोर्ट और नई के साथ अनुमोदन अनिवार्य है।
बीसीआई ने अपने पत्र में कुछ प्रमुख बातों का उल्लेख किया है, जिनमें कहा गया है, कि केवल नियमित पढ़ाई ही मान्य होगी।
बिना अनुमति चल रही शिफ्ट कक्षाओं, पार्ट टाइम व्यवस्थाओं और फर्जी हाजिरी पर तत्काल रोक लगाई जाए।
विश्वविद्यालयों द्वारा छह सप्ताह के भीतर सभी शिक्षण केन्द्रों का प्रत्यक्ष और व्यापक भौतिक निरीक्षण किया जाएगा।
निरीक्षण टीमों को कक्षाओं, फैकल्टी, बायोमैट्रिक और उपस्थिति रजिस्टर, पुस्तकालय, मूट कोर्ट एवं जियो टैग तस्वीरों के साथ रिपोर्ट जमा करनी होगी।
क्रियान्वयन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर उसका नाम, पद, मोबाइल नंबर व ईमेल बीसीआई को दिया जाएगा।
बिना मान्यता या गैर-कानूनी व्यवस्था संचालन पर कार्रवाई की चेतावनी।
बीसीआई के इस आदेश के बाद उच्च शिक्षा विभाग के अपर संचालक प्रो. एसआर कमलेश ने कहा, कि बार काउंसिल के मापदंडों और आदेशों का कॉलेजों में कड़ाई से पालन कराया जाएगा।