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रायपुर। साइबर अपराधी लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। अब सोशल मीडिया पर एडल्ट कंटेंट दिखाने वाले विज्ञापनों के जरिए लोगों को संदिग्ध ऐप डाउनलोड कराने और फिर मोबाइल का एक्सेस हासिल करने का तरीका सामने आया है। इसमें ठग पहले यूजर की उत्सुकता को निशाना बनाते हैं और फिर उसे एक फर्जी वेबसाइट या लिंक पर ले जाकर APK फाइल इंस्टॉल करने के लिए कहते हैं।
खतरा सिर्फ ऐप डाउनलोड करने तक सीमित नहीं रहता। संदिग्ध ऐप इंस्टॉल होने के बाद यह यूजर से कई तरह की संवेदनशील परमिशन मांग सकता है। यदि यूजर बिना जांचे Accessibility, SMS, फोन या अन्य संवेदनशील एक्सेस दे देता है तो साइबर अपराधियों के लिए मोबाइल में मौजूद जानकारी तक पहुंच बनाने का रास्ता खुल सकता है। इसके बाद बैंकिंग, UPI और दूसरे ऑनलाइन अकाउंट से जुड़े फ्रॉड का जोखिम बढ़ जाता है।
गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) देश में साइबर अपराधों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए काम करता है। I4C के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है। वित्तीय साइबर फ्रॉड की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन पर तत्काल संपर्क करने की सलाह दी जाती है।
कैसे शुरू होता है एडल्ट ऐप स्कैम?
इस तरह के स्कैम में साइबर अपराधी सबसे पहले सोशल मीडिया यूजर्स को आकर्षित करने वाला विज्ञापन दिखा सकते हैं। विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद यूजर को दूसरी वेबसाइट पर भेजा जाता है। यहां उसे वीडियो या अन्य कंटेंट देखने के लिए कोई ऐप डाउनलोड करने को कहा जाता है।
अक्सर यह ऐप Google Play Store के बजाय सीधे APK फाइल के रूप में डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।
ऐप इंस्टॉल होने के बाद यह अलग-अलग परमिशन मांग सकता है। यदि यूजर बिना सोचे-समझे सभी परमिशन दे देता है तो उसके डिवाइस और निजी जानकारी की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
पूरा खेल ऐसे समझें
सोशल मीडिया विज्ञापन → फर्जी वेबसाइट → APK डाउनलोड → संदिग्ध ऐप इंस्टॉल → संवेदनशील परमिशन → मोबाइल डेटा तक पहुंच → संभावित बैंकिंग/UPI फ्रॉड
यानी शुरुआत एक विज्ञापन से होती है, लेकिन इसका अंतिम निशाना आपका मोबाइल और उसमें मौजूद संवेदनशील जानकारी हो सकती है।
APK फाइल क्या होती है?
APK यानी Android Package Kit। यह Android डिवाइस पर ऐप इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल होने वाली फाइल होती है।
आमतौर पर लोग ऐप को आधिकारिक ऐप स्टोर से डाउनलोड करते हैं। लेकिन APK फाइल के जरिए ऐप को सीधे फोन में भी इंस्टॉल किया जा सकता है। यही सुविधा साइबर अपराधियों के लिए एक जोखिम बन सकती है, जब यूजर किसी अनजान वेबसाइट या लिंक से संदिग्ध APK डाउनलोड कर लेता है।
I4C की साइबर सुरक्षा संबंधी सलाह में भी अनजान या अनधिकृत स्रोतों से APK डाउनलोड करने से बचने की बात कही गई है।
Accessibility Permission क्यों है खतरनाक?
Accessibility यानी एक्सेसिबिलिटी परमिशन Android की एक संवेदनशील सुविधा है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद यूजर्स को फोन इस्तेमाल करने में मदद देना है, लेकिन किसी संदिग्ध ऐप को यह एक्सेस देना सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है।
गलत ऐप को ऐसी अनुमति मिलने पर वह फोन की स्क्रीन पर दिखाई देने वाली गतिविधियों को पढ़ने या यूजर इंटरफेस के साथ इंटरैक्ट करने जैसी क्षमताओं का दुरुपयोग कर सकता है।
इसलिए किसी भी अनजान ऐप को सिर्फ इसलिए Accessibility Permission नहीं देनी चाहिए क्योंकि वह ऐप इसके बिना काम करने से मना कर रहा है।
इन ऐप्स के नाम को लेकर दी गई चेतावनी
दिए गए साइबर सुरक्षा इनपुट के मुताबिक, एडल्ट कंटेंट के नाम पर प्रचारित किए जा रहे कुछ संदिग्ध Android ऐप्स को लेकर चेतावनी दी गई है। इनमें:
- Night Play
- Reloop
- Kyss
- Vimo
- Rivo
- Nexo
- Vixa
शामिल हैं।
हालांकि सिर्फ किसी नाम की सूची देखकर ही सुरक्षा का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। समय के साथ साइबर अपराधी ऐप के नाम, वेबसाइट और लिंक बदल सकते हैं। इसलिए किसी भी अनजान APK या संदिग्ध ऐप से सावधान रहना जरूरी है।
कैसे पहचानें कि फोन में संदिग्ध ऐप इंस्टॉल हो गया है?
अगर फोन में अचानक कोई अनजान ऐप दिखाई दे, बैटरी या डेटा की खपत असामान्य रूप से बढ़ जाए, फोन के व्यवहार में बदलाव आए या कोई ऐप ऐसी परमिशन मांगने लगे जिसकी उसे जरूरत नहीं है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
खास तौर पर यह देखें कि फोन में हाल में कौन-कौन से नए ऐप इंस्टॉल हुए हैं और उन्हें कौन-कौन सी परमिशन मिली हुई है।
बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
1. ऐप हमेशा आधिकारिक स्रोत से डाउनलोड करें।
अनजान वेबसाइट, सोशल मीडिया लिंक या मैसेज से APK डाउनलोड करने से बचें।
2. ऐप की परमिशन जांचें।
किसी ऐप को वही परमिशन दें जिसकी उसके काम के लिए वास्तव में जरूरत हो।
3. Accessibility Permission को लेकर सावधान रहें।
किसी अनजान ऐप को यह एक्सेस देने से पहले अच्छी तरह जांच करें।
4. SMS और फोन की संवेदनशील परमिशन न दें।
जिस ऐप के काम से इनका कोई संबंध नहीं है, उसे ऐसी अनुमति देना जोखिम बढ़ा सकता है।
5. डेवलपर और रिव्यू जांचें।
ऐप किस डेवलपर ने बनाया है, कितने डाउनलोड हैं और यूजर्स की क्या प्रतिक्रिया है, यह देखें।
6. लालच या उत्सुकता में तुरंत क्लिक न करें।
जो विज्ञापन आपको तुरंत कुछ डाउनलोड करने या कोई कार्रवाई करने के लिए दबाव डालता है, उससे सावधान रहें।
गलती से संदिग्ध ऐप इंस्टॉल हो जाए तो क्या करें?
अगर आपने गलती से कोई संदिग्ध APK इंस्टॉल कर लिया है तो सबसे पहले घबराएं नहीं। फोन की सेटिंग्स में जाकर उस ऐप की दी गई परमिशन की जांच करें और संदिग्ध एक्सेस बंद करें।
खास तौर पर Accessibility Access को चेक करें। इसके बाद संदिग्ध ऐप को अनइंस्टॉल करें।
अगर ऐप को पहले से संवेदनशील परमिशन दी जा चुकी है तो केवल ऐप डिलीट कर देना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। बैंकिंग और UPI ट्रांजैक्शन की जांच करें। संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें और जरूरत पड़ने पर संबंधित अकाउंट को सुरक्षित कराएं।
साथ ही ईमेल, बैंकिंग और अन्य महत्वपूर्ण अकाउंट के पासवर्ड बदलना तथा Two-Factor Authentication (2FA) चालू करना उपयोगी सुरक्षा कदम हो सकता है।
अगर पैसे की ठगी हो गई तो तुरंत क्या करें?
अगर संदिग्ध ऐप के जरिए बैंकिंग या UPI फ्रॉड हो गया है तो समय बर्बाद न करें। भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार वित्तीय साइबर फ्रॉड की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन उपलब्ध है। ऑनलाइन शिकायत cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है।
इसके अलावा संबंधित बैंक को तुरंत सूचना दें, ताकि खाते या ट्रांजैक्शन को सुरक्षित करने के लिए जरूरी कार्रवाई की जा सके।
हर सोशल मीडिया विज्ञापन खतरनाक नहीं, लेकिन सावधानी जरूरी
सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला हर विज्ञापन साइबर फ्रॉड नहीं होता। लेकिन किसी विज्ञापन को देखकर बिना जांचे लिंक खोलना, अनजान वेबसाइट पर जाना या APK डाउनलोड करना जोखिम पैदा कर सकता है।
खास तौर पर ऐसे विज्ञापनों से सावधान रहें जो उत्सुकता, लालच, डर या जल्दबाजी पैदा करके तुरंत ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं।
याद रखें
एक क्लिक से शुरू होने वाला लालच आपके पूरे मोबाइल की सुरक्षा पर भारी पड़ सकता है।
एडल्ट कंटेंट का लालच हो या किसी दूसरे फ्री ऑफर का—अनजान लिंक से APK डाउनलोड न करें, संदिग्ध ऐप को संवेदनशील परमिशन न दें और किसी भी वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 पर शिकायत करें।