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देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब धीरे-धीरे वापसी की ओर बढ़ रहा है, लेकिन कई राज्यों में बारिश से जुड़ी मुश्किलें और हादसे अभी भी जारी हैं। मध्य प्रदेश में उफनते नाले ने आठ लोगों की जान ले ली, वहीं उत्तराखंड में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर लगातार भूस्खलन और पत्थर गिरने से यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई। दूसरी ओर, मौसम विभाग ने राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू होने की पुष्टि की है।
आगर-मालवा में उफनते नाले में बही कार, 8 की मौत
मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में शनिवार को भारी बारिश के बाद एक दर्दनाक हादसा हो गया। नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर के पास बरसाती नाले का पानी तेज बहाव में था। इसी दौरान श्रद्धालुओं से भरी कार नाले की चपेट में आकर बह गई।
हादसे में कार सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई। मृतकों में ओडिशा के एक ही परिवार के सात सदस्य शामिल थे, जबकि आठवां व्यक्ति कार चालक था। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
बताया गया कि परिवार उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर जा रहा था। मंदिर के पास बरसाती नाले को पार करने के दौरान तेज बहाव के बीच कार बह गई। सूचना मिलते ही प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे और वाहन की तलाश शुरू की गई। बाद में कार को बाहर निकाला गया, लेकिन उसमें सवार लोगों को बचाया नहीं जा सका।
इस हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है। घटना ने एक बार फिर बारिश के दौरान उफनते नालों और जलभराव वाले रास्तों पर आवाजाही के खतरे को सामने ला दिया है।
केदारनाथ पैदल मार्ग पर भी खतरा
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ पैदल मार्ग पर भी बारिश और भूस्खलन की वजह से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। चीरबासा के पास पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे मार्ग की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को यात्रियों की आवाजाही नियंत्रित करनी पड़ी।
शनिवार को चीरबासा के पास प्रभावित हिस्से में यात्रियों की आवाजाही करीब तीन घंटे तक रोकी गई। यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर मार्ग की स्थिति का जायजा लिया गया। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से के सुधार और चौड़ीकरण का काम पूरा होने पर यात्रा दोबारा शुरू कराई गई।
केदारनाथ मार्ग पर चीरबासा क्षेत्र पहले भी भूस्खलन और बोल्डर गिरने की घटनाओं के कारण संवेदनशील रहा है। सितंबर में यहां पहाड़ी से पत्थर गिरने से एक व्यक्ति की मौत भी हुई थी और बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।
राजस्थान से मानसून की विदाई शुरू
इधर देश में मानसून की वापसी की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 19 सितंबर को दक्षिण-पश्चिम मानसून पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापस लौट गया। सामान्य तौर पर पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी की शुरुआत 17 सितंबर के आसपास होती है, यानी इस बार वापसी करीब दो दिन बाद शुरू हुई।
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में मानसून के पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से आगे बढ़कर लौटने की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है। इसके साथ इन इलाकों में मानसूनी बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने लगती है।
हालांकि मानसून की वापसी का मतलब यह नहीं है कि देशभर में बारिश तुरंत खत्म हो जाएगी। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण बारिश जारी रह सकती है। इसलिए पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मैदानी इलाकों में अचानक बढ़ते जलस्तर को लेकर अभी भी सावधानी जरूरी है।
एक तरफ विदाई, दूसरी तरफ बारिश का असर
कुल मिलाकर देश में मौसम एक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है, लेकिन मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में बारिश अभी भी जानलेवा साबित हो रही है। आगर-मालवा की घटना जहां उफनते नाले के खतरे की गंभीर तस्वीर सामने रखती है, वहीं केदारनाथ मार्ग पर लगातार गिरते पत्थर और भूस्खलन पहाड़ी इलाकों में यात्रियों के लिए मौसम की चुनौती को दिखाते हैं।
ऐसे में मानसून की वापसी के बावजूद संवेदनशील इलाकों में प्रशासन की निगरानी और लोगों की सतर्कता जरूरी बनी हुई है।