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अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के काफिले से जुड़ा एक विवाद सामने आया है। लहपटरा टोल प्लाजा पर मंत्री की गाड़ी पर टोल बैरियर का बूम गिरने के बाद उनके निजी सहायक (PA) ओम प्रकाश राजवाड़े ने कथित तौर पर टोल कर्मचारी के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। आरोप है कि PA ने टोलकर्मी को कई थप्पड़ जड़े। घटना टोल प्लाजा पर लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है।
मामला लखनपुर थाना क्षेत्र का है। घटना के अगले दिन पीड़ित टोल कर्मचारी महेंद्र राजवाड़े अपने साथियों और ग्रामीणों के साथ थाने पहुंचा और मारपीट की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़ित का मेडिकल परीक्षण (MLC) कराया है। हालांकि, गुरुवार शाम तक मामले में FIR दर्ज नहीं की गई थी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो वे आंदोलन करेंगे।
टोल प्लाजा पर कैसे हुआ पूरा विवाद?
जानकारी के मुताबिक, बुधवार 2 सितंबर की रात करीब साढ़े 12 बजे मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े बिलासपुर से अंबिकापुर की ओर आ रही थीं। उनके काफिले में दो वाहन शामिल थे। सबसे आगे एक इनोवा कार चल रही थी, जबकि उसके पीछे मंत्री की फॉर्च्यूनर थी।
काफिले की पहली गाड़ी इनोवा टोल बैरियर से आसानी से निकल गई। इसके बाद जैसे ही मंत्री की फॉर्च्यूनर टोल नाके से गुजर रही थी, अचानक टोल बैरियर का बूम नीचे आ गया और गाड़ी के ऊपर गिर गया। इससे मंत्री की गाड़ी को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
बूम गिरने के बाद काफिले की दोनों गाड़ियां रुक गईं। इसी दौरान मंत्री के PA ओम प्रकाश राजवाड़े सुरक्षाकर्मियों के साथ गाड़ी से नीचे उतरे और टोल बूथ पर पहुंचे।
टोलकर्मी से गाली-गलौज और मारपीट का आरोप
आरोप है कि PA ने टोलकर्मी महेंद्र राजवाड़े के साथ पहले गाली-गलौज की और फिर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। CCTV फुटेज में कथित तौर पर PA द्वारा टोलकर्मी को थप्पड़ मारते हुए देखा जा सकता है।
बताया जा रहा है कि टोलकर्मी इस दौरान माफी मांगता रहा, लेकिन इसके बावजूद उसके साथ मारपीट जारी रही। घटनास्थल पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव किया और PA को वहां से हटाकर वापस वाहन की ओर ले गए।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपनी गाड़ी से नीचे नहीं उतरीं। वह वाहन के अंदर ही बैठी रहीं।
टोल प्लाजा पर लगे CCTV कैमरे में विवाद और मारपीट की पूरी घटना रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वीडियो के आधार पर अब पीड़ित पक्ष पुलिस से कार्रवाई की मांग कर रहा है।
अगले दिन थाने पहुंचा टोलकर्मी
घटना के अगले दिन गुरुवार 3 सितंबर को टोलकर्मी महेंद्र राजवाड़े अपने अन्य कर्मचारियों और ग्रामीणों के साथ लखनपुर थाने पहुंचा। यहां उसने पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए मारपीट की शिकायत की।
पुलिस ने शिकायत के बाद पीड़ित का MLC कराया। हालांकि, गुरुवार शाम तक FIR दर्ज नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली।
पीड़ित के साथ थाने पहुंचे ग्रामीणों ने पुलिस को चेतावनी दी कि यदि मामले में FIR दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करेंगे।
फॉलो वाहन नहीं होने की वजह से गिरा टोल बूम?
घटना के पीछे टोल बैरियर के मैकेनिज्म और मंत्री के काफिले में फॉलो वाहन नहीं होने की बात भी सामने आ रही है।
जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अपने काफिले को छोटा किया है और फॉलो वाहन हटा दिया गया है। काफिले में आगे चल रही इनोवा के टोल बैरियर पार करते ही टोल सिस्टम ने सामान्य प्रक्रिया के तहत बूम को नीचे कर दिया।
आमतौर पर किसी वीआईपी काफिले के दौरान फॉलो वाहन होने पर टोल कर्मचारी काफिले की अगली गाड़ी के बाद आने वाले वाहन के लिए बैरियर को खुला रखते हैं। लेकिन इस मामले में फॉलो वाहन नहीं होने के कारण टोल कर्मचारियों को संभवतः यह जानकारी नहीं हो सकी कि दूसरी गाड़ी में मंत्री सवार हैं।
इसी दौरान इनोवा के टोल पार करने के बाद बैरियर नीचे आया और पीछे आ रही मंत्री की फॉर्च्यूनर के ऊपर गिर गया।
मंत्री की गाड़ी भी हुई क्षतिग्रस्त
बूम गिरने से मंत्री की फॉर्च्यूनर को भी नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है। इसी घटना के बाद PA और टोल कर्मचारी के बीच विवाद बढ़ा और कथित तौर पर मारपीट हुई।
अब इस पूरे मामले में CCTV फुटेज अहम साक्ष्य माना जा रहा है। पीड़ित पक्ष पुलिस से CCTV फुटेज के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।
FIR को लेकर बनी स्थिति
फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। पीड़ित की शिकायत, MLC और CCTV फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
वहीं, ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर कार्रवाई नहीं की तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ऐसे में मंत्री के PA और टोलकर्मी के बीच हुई यह मारपीट अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है।
हालांकि, मामले में पुलिस की अंतिम कार्रवाई और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।