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वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता की उम्मीद एक बार फिर मजबूत होती नजर आ रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के पाकिस्तान दौरे के बाद क्षेत्रीय कूटनीति में नई हलचल देखी जा रही है। माना जा रहा है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री की टीम इस्लामाबाद में मौजूद अमेरिकी प्रतिनिधियों से बैकडोर डिप्लोमेसी के जरिए बातचीत की जमीन तैयार कर सकती है। हालांकि दोनों देशों के बीच फिलहाल किसी औपचारिक बैठक की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पर्दे के पीछे संवाद की कोशिशें तेज हो गई हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी सहयोगियों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को पाकिस्तान भेजा है, ताकि क्षेत्रीय हालात पर नजर रखी जा सके। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
ईरान की ओर से अमेरिका को चेतावनी भी दी गई है कि यदि 48 घंटे के भीतर करीब 11 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को लेकर कोई सकारात्मक पहल नहीं होती, तो मौजूदा कूटनीतिक माहौल बिगड़ सकता है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब वॉशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान, ओमान और रूस जैसे देशों की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच संवाद की संभावनाएं बढ़ी हैं। यदि यह पहल सफल रहती है तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।