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रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रायपुर में आयोजित ऑर्गनाइजर के कॉनक्लेव में कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने माओवादी हिंसा को लेकर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “मैं भूपेश बघेल के कार्यकाल में भी केंद्रीय गृह मंत्री था और पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूं कि उस समय की सरकार ने माओवादी आतंक को प्रश्रय दिया।” शाह ने सवाल उठाया कि कोई भी सरकार किसी हथियारबंद समूह को कैसे संरक्षण दे सकती है।
यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित “छत्तीसगढ़ @25 : शिफ्टिंग द लेंस” विषयक आयोजन का हिस्सा था। इस अवसर पर गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल स्वयं विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, बल्कि नए भारत के निर्माण में एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य विकसित भारत @2047 की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
अमित शाह ने कहा कि “विकसित छत्तीसगढ़” केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि स्पष्ट विचारधारा, सुशासन और 25 वर्षों की निरंतर विकास यात्रा का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कभी छोटे राज्यों की अवधारणा पर सवाल उठाए जाते थे, लेकिन छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड ने यह साबित कर दिया है कि यदि शासन स्पष्ट दृष्टि से संचालित हो, तो छोटे राज्य भी बड़े विकास मॉडल बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जब इन राज्यों के गठन के लिए आंदोलन हो रहे थे, उस समय लंबे समय तक देश में कांग्रेस की सरकार रही और यह तर्क दिया जाता था कि छोटे राज्यों के पास संसाधन नहीं होंगे और वे विकास नहीं कर पाएंगे। उस दौर में छत्तीसगढ़ भोपाल से 500 किलोमीटर से अधिक दूर था और संयुक्त मध्यप्रदेश की प्रशासनिक संरचना ऐसी थी कि इस क्षेत्र के साथ न्याय करना कठिन था। शाह ने स्पष्ट किया कि यह किसी तत्कालीन मुख्यमंत्री की विफलता नहीं, बल्कि व्यवस्था की सीमा थी।
गृह मंत्री ने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते हुए छोटे राज्यों के गठन का ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यह कोई प्रशासनिक प्रयोग नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने का विचारधारात्मक निर्णय था। इसी के तहत मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़, बिहार से झारखंड और उत्तरप्रदेश से उत्तराखंड का गठन हुआ।
उन्होंने कांग्रेस शासन में हुए आंध्रप्रदेश–तेलंगाना विभाजन से इसकी तुलना करते हुए कहा कि वहां कानून पारित करने के दौरान लोकसभा से सांसदों को बाहर निकालना पड़ा और दोनों राज्यों के बीच कटुता वर्षों तक बनी रही, जबकि वाजपेयी जी के नेतृत्व में हुए राज्य विभाजन शांतिपूर्ण रहे और आज संबंधित राज्य एक-दूसरे के पूरक बनकर देश के विकास में योगदान दे रहे हैं।
अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने 25 वर्षों में ऐतिहासिक परिवर्तन देखा है। कभी ‘बीमारू’ श्रेणी में गिने जाने वाले क्षेत्र आज विकसित राज्य बनने की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने बताया कि इन 25 वर्षों में लगभग 18 वर्ष भाजपा की सरकार रही, जबकि 7 वर्ष कांग्रेस शासन रहा।
आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए शाह ने कहा कि राज्य का वार्षिक बजट 30 गुना बढ़ा है, प्रति व्यक्ति आय में 17 गुना वृद्धि हुई है और जीएसडीपी 25 गुना बढ़ा है। राज्य की आर्थिक सेहत को मापने वाले सभी 16 संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
कृषि क्षेत्र में उपलब्धियों का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सिंचाई क्षमता दोगुनी हुई है। खरीफ उत्पादन तीन गुना और रबी उत्पादन लगभग छह गुना बढ़ा है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में जिला अस्पतालों की संख्या 7 से बढ़कर 30 हो गई है, मेडिकल कॉलेज 1 से बढ़कर 16 हो गए हैं और आंगनबाड़ी भवनों में 18 गुना वृद्धि हुई है।
कुपोषण से मृत्यु दर 61 से घटकर 15, मातृ मृत्यु दर 365 से घटकर 146 और शिशु मृत्यु दर 79 से घटकर 37 पर आ गई है।
आदिवासी कल्याण पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि राज्य की साक्षरता दर 65 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने बताया कि जहां पहले एक भी एकलव्य आवासीय विद्यालय नहीं था, आज 75 संचालित हो रहे हैं और छात्रावासों में पढ़ने वाले आदिवासी बच्चों की संख्या तीन गुना बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि यदि देश में किसी राज्य ने सबसे बेहतर आदिवासी कल्याण किया है, तो वह छत्तीसगढ़ है।
माओवादी हिंसा पर बोलते हुए शाह ने कहा कि यह न तो केवल विकास की कमी का परिणाम है और न ही सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या, बल्कि पूरी तरह विचारधारात्मक चुनौती है। उन्होंने कहा कि बंदूक के दम पर समाधान भारतीय संविधान की आत्मा के खिलाफ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी पर गोली नहीं चलाना चाहती और हथियार डालने वालों के लिए *रेड कारपेट* बिछा है। उन्होंने आदिवासी युवाओं से आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
केंद्रीय गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि बस्तर सहित माओवादी प्रभावित क्षेत्र तेजी से विकास की राह पर हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 31 मार्च 2026 से पहले देश को माओवादी समस्या से पूरी तरह मुक्त करने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि छत्तीसगढ़ ने जिस गति से प्रगति की है, आने वाले 25 वर्षों में वह दोगुनी रफ्तार से आगे बढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।