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नई दिल्ली: सोमवार को लोकसभा में नक्सलवाद पर हुई विस्तृत चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि “भारत अब नक्सल-मुक्त हो गया है, ऐसा हम कह सकते हैं,” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था के औपचारिक सत्यापन के बाद देश को आधिकारिक रूप से सूचित किया जाएगा।
करीब डेढ़ घंटे के अपने भाषण में शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की रणनीति, उपलब्धियों और विपक्ष पर तीखे आरोपों को विस्तार से रखा।
गृह मंत्री ने याद दिलाया कि सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई, विकास योजनाओं और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने से स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि “जो लोग लोकतांत्रिक व्यवस्था को नकारकर हथियार उठाते हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।”
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि यह इलाका, जो कभी नक्सलवाद का गढ़ माना जाता था, अब लगभग पूरी तरह मुक्त हो चुका है।
उन्होंने बताया कि वहां हर गांव में स्कूल खोलने का अभियान चलाया गया। राशन की दुकानों का विस्तार किया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्थापित किए गए। आधार और राशन कार्ड के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाया गया। शाह के अनुसार, “लाल आतंक का साया हटने के बाद बस्तर अब विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।”
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि नक्सलवाद को केवल गरीबी या विकास की कमी से जोड़ना गलत है। उनके कहा नक्सलवाद की जड़ें वैचारिक हैं। वामपंथी विचारधारा ने आदिवासियों को भ्रमित किया। नक्सलवाद के कारण ही आदिवासी क्षेत्रों में विकास बाधित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि “भोले-भाले आदिवासियों को सालों तक अंधेरे में रखा गया।”
शाह ने विपक्ष, खासकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 60 साल के शासन के बावजूद आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंचाई गईं। अब वही लोग सरकार से हिसाब मांग रहे हैं।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राहुल गांधी पर भी आरोप लगाए कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने नक्सल समर्थक विचारों को बढ़ावा दिया।
साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें माओवादी हिंसा को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया गया था।
शाह ने उन लोगों की भी आलोचना की जिन्हें उन्होंने “अर्बन नक्सली” कहा। उनके अनुसार कुछ लोग नक्सलियों के समर्थन में खड़े होते हैं। वे मानवाधिकार की बात करते हैं, लेकिन आम नागरिकों के प्रति संवेदनशील नहीं होते। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि उनकी मानवता सिर्फ हथियार उठाने वालों के लिए है।”
गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 706 नक्सली मारे गए। 2218 गिरफ्तार हुए और 4839 ने आत्मसमर्पण किया।
इसके अलावा 2014 में 126 नक्सल प्रभावित जिले थे, जो अब घटकर 2 रह गए हैं। अत्यधिक प्रभावित जिले 35 से घटकर शून्य हो गए। नक्सल घटनाओं वाले पुलिस स्टेशन 350 से घटकर 7 रह गए है।