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रायपुर। छत्तीसगढ़ की बेटी अमिता श्रीवास ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest फतह कर इतिहास रच दिया है। 22 मई की शाम उन्होंने 8,848.86 मीटर ऊंची एवरेस्ट चोटी पर तिरंगा फहराकर प्रदेश का नाम रोशन किया। इस उपलब्धि के साथ अमिता एवरेस्ट जीतने वाली छत्तीसगढ़ की दूसरी महिला पर्वतारोही बन गई हैं।
हालांकि इस ऐतिहासिक सफलता के बीच अभियान से दुखद खबर भी सामने आई। वापसी के दौरान टीम के दो सदस्यों की मौत हो गई, जबकि अमिता खुद गंभीर फ्रॉस्टबाइट की शिकार हो गईं। फिलहाल उनका इलाज नेपाल की राजधानी Kathmandu के अस्पताल में चल रहा है।
अमिता श्रीवास ने बताया कि एवरेस्ट शिखर पर पहुंचने के बाद वह सुरक्षित नीचे उतरीं और कैंप-2 होते हुए 23 मई की रात बेस कैंप पहुंचीं। लेकिन अत्यधिक ठंड और बर्फीली हवाओं के कारण उनके बाएं हाथ की दो उंगलियों में गंभीर फ्रॉस्टबाइट हो गया।
रविवार सुबह करीब 10:30 बजे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें हेलिकॉप्टर से काठमांडू स्थित Norvic International Hospital ले जाया गया। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत फिलहाल स्थिर है।

अभियान के दौरान टीम को बड़ा झटका भी लगा। अमिता के अनुसार एवरेस्ट फतह के बाद लौटते समय अत्यधिक थकान और ऑक्सीजन की कमी के कारण दो सदस्यों की मौत हो गई।
मृतकों में हैदराबाद निवासी अरुण तिवारी और यूनाइटेड किंगडम के संदीप आरे शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और शरीर पर अत्यधिक दबाव के कारण दोनों की हालत बिगड़ी और रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
यह अंतरराष्ट्रीय अभियान 26 अप्रैल को देवी ग्रीन तारा की विशेष पूजा के साथ शुरू हुआ था। इसके बाद नौ सदस्यीय टीम ने एवरेस्ट चढ़ाई शुरू की। बर्फीले तूफान, कड़ाके की ठंड और ऑक्सीजन की कमी जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अमिता ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
अमिता की सफलता से जांजगीर-चांपा समेत पूरे छत्तीसगढ़ में खुशी का माहौल है। लोग उनके साहस और जज्बे की सराहना कर रहे हैं, वहीं उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की जा रही है।