

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

tvisha sharma death case cbi investigation bhopal dowry harassment case 2026
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से जुड़े चर्चित त्विषा शर्मा मौत मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने औपचारिक रूप से अपने हाथ में ले ली है। राज्य सरकार की सिफारिश के बाद सीबीआई ने इस संवेदनशील केस की नई एफआईआर दर्ज कर जांच की रफ्तार तेज कर दी है। इसके साथ ही भोपाल पुलिस द्वारा पहले दर्ज की गई मूल एफआईआर को भी केंद्रीय एजेंसी ने री-रजिस्टर कर अपने रिकॉर्ड में शामिल कर लिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई की एक विशेष जांच टीम भोपाल पहुंच चुकी है। टीम ने प्रारंभिक स्तर पर केस से जुड़े दस्तावेज, पुलिस रिकॉर्ड और अब तक की जांच रिपोर्ट का अध्ययन शुरू कर दिया है। एजेंसी जल्द ही घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण और गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
सीबीआई द्वारा दर्ज नई एफआईआर में नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की गंभीर धाराएं शामिल की गई हैं-
BNS धारा 80(2) – दहेज हत्या
BNS धारा 85 – क्रूरता और उत्पीड़न
BNS धारा 3(5) – आपराधिक साजिश और सामान्य आशय
दहेज प्रतिषेध अधिनियम धारा 3 और 4 – दहेज लेना और देना तथा प्रताड़ना से संबंधित प्रावधान
इन धाराओं के तहत अब पूरे मामले की विधिक जांच आगे बढ़ेगी।
एफआईआर में दर्ज जानकारी के अनुसार, मृतका त्विषा शर्मा का विवाह 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह के साथ हुआ था। परिवार का आरोप है कि विवाह के कुछ ही समय बाद से ससुराल पक्ष द्वारा अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा।
परिजनों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ और प्रताड़ना लगातार बढ़ती रही।
इस मामले में मृतका के परिवार की शिकायत के आधार पर दो लोगों को मुख्य आरोपी बनाया गया है-
सास गिरिबाला सिंह
पति समर्थ सिंह
इन दोनों पर दहेज प्रताड़ना और साजिश में शामिल होने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
घटना 12 मई 2026 की रात करीब 10:20 बजे सामने आई थी, जब पुलिस को सूचना मिली कि एक महिला की मौत फांसी लगाने से हुई है। प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या माना गया था, लेकिन विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।
रिपोर्ट में “एंटीमॉर्टम हैंगिंग” की पुष्टि हुई है, जिसका अर्थ है कि फांसी की घटना उस समय हुई जब पीड़िता जीवित थी। इसके साथ ही शरीर पर कई जगह गंभीर चोटों के निशान भी पाए गए हैं।
फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, ये चोटें किसी भारी वस्तु से वार या हिंसक मारपीट की ओर संकेत करती हैं। यही वजह है कि अब मामला हत्या और दहेज प्रताड़ना दोनों कोणों से देखा जा रहा है।
मृतका के परिजनों ने साफ आरोप लगाया है कि यह पूरी घटना अतिरिक्त दहेज की मांग पूरी न होने के कारण हुई है। परिवार का कहना है कि शादी के बाद से ही त्विषा को लगातार मानसिक दबाव में रखा गया और अंततः उसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हो गई।
मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम (DSPE Act)’ की धारा 6 के तहत इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी। सरकार का मानना था कि मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच केवल केंद्रीय एजेंसी ही कर सकती है।
सीबीआई अब जल्द ही आरोपियों से पूछताछ, डिजिटल साक्ष्य जुटाने और मेडिकल-फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर जांच को आगे बढ़ाएगी। संभावना है कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल केस में कई अहम खुलासे हो सकते हैं।