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ayatollah ali khamenei buried in mashhad amid renewed us iran conflict
तेहरान/मशहद। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को युद्ध की शुरुआत में हुए हमलों में मारे जाने के कई महीनों बाद उनके गृहनगर मशहद में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के दौरान अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों में उनकी मौत हुई थी। वह करीब 37 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे और देश की राजनीति, विदेश नीति तथा सैन्य रणनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरे माने जाते थे।
दफन समारोह से पहले कई दिनों तक राष्ट्रीय शोक मनाया गया। अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उमड़े और अमेरिका तथा इजराइल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए।
मशहद में दफन होने वाले दूसरे बड़े शासक
अयातुल्ला खामेनेई ईरान के इतिहास में दूसरे ऐसे प्रमुख शासक बने जिन्हें मशहद शहर में दफनाया गया। इससे पहले वर्ष 1747 में हत्या के बाद तत्कालीन शासक नादेर शाह को भी इसी शहर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया था।
अंतिम संस्कार के दौरान बंद रही राजधानी
शनिवार से शुरू हुई अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों में सड़कों पर यातायात सीमित कर दिया गया। हवाई क्षेत्र पर भी प्रतिबंध लगाए गए और कई सरकारी गतिविधियां स्थगित रहीं। हजारों लोगों ने खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि दी।
अंतिम संस्कार के बीच फिर तेज हुआ युद्ध
इधर अंतिम संस्कार के बीच अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ गया। गुरुवार तड़के अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर नए हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाया। बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन में मिसाइल हमलों और सायरन की घटनाओं ने पूरे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ा दिया।
बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में हाई अलर्ट
बहरीन, जहां अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय स्थित है, वहां कई बार एयर रेड सायरन बजाए गए। कुवैत और कतर की ओर भी मिसाइलें दागी गईं। जॉर्डन में भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया कि रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस को निशाना बनाया।
ईरान में 90 ठिकानों पर अमेरिकी हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि उसकी सेना ने ईरान के 90 सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की। जारी किए गए वीडियो में एयरपोर्ट रनवे और मिसाइल लॉन्चर को निशाना बनाते हुए हमले दिखाए गए। अमेरिका का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है।
युद्धविराम पर फिर मंडराया संकट
इन हमलों से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर ईरानी हमलों के कारण नाजुक युद्धविराम खतरे में पड़ गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हमले नहीं रुके तो संघर्ष और व्यापक हो सकता है। इससे पूरे मध्य-पूर्व में नए युद्ध की आशंका बढ़ गई है।
14 लोगों की मौत, कई घायल
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी हवाई हमलों में दो दिनों के भीतर कम से कम 14 लोगों की मौत हुई, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। अधिकांश मृतक सुरक्षा बलों से जुड़े बताए जा रहे हैं। वहीं कुवैत में मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने के दौरान मलबा गिरने से एक व्यक्ति घायल हुआ।
होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र
युद्ध का सबसे बड़ा असर होर्मुज स्ट्रेट पर दिखाई दे रहा है। दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। समुद्री डेटा के अनुसार, जून में इस मार्ग से करीब 576 जहाज गुजरे, जबकि मई में यह संख्या 233 थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
मध्य-पूर्व में बढ़ी अनिश्चितता
खामेनेई के अंतिम संस्कार के साथ ही ईरान में एक युग का अंत माना जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता सैन्य टकराव पूरे मध्य-पूर्व को फिर से बड़े युद्ध की ओर धकेलता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक कूटनीति पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।