

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

bastar tribal release protest nagarnar plant privatization jagdalpur news
जगदलपुर: बस्तर अंचल में नक्सल मामलों के नाम पर वर्षों से जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई की मांग अब छात्र-युवाओं के एक बड़े आंदोलन का रूप लेती जा रही है। इसी मुख्य मुद्दे को लेकर शनिवार को जगदलपुर में 'जेन-जी' (Gen-Z) युवाओं के नेतृत्व में एक विशाल 'छात्र-युवा बदलाव रैली' निकाली गई। अखिल भारतीय नौजवान सभा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) की बस्तर जिला इकाई के आह्वान पर निकली इस रैली में भारी संख्या में छात्र, युवा, किसान, मजदूर और आदिवासी शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख रूप से मांग उठाई कि बस्तर की जेलों में नक्सल मामलों में बंद आदिवासियों के मुकदमों की निष्पक्ष और समयबद्ध समीक्षा की जानी चाहिए। उनका कहना था कि जिन मामलों में आरोप पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं हो पाए हैं, ऐसे लोगों को कानून के दायरे में राहत देते हुए दोषमुक्त किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि कई आदिवासी लंबे समय से बिना पुख्ता सबूतों के जेल की सजा काट रहे हैं, जिससे उनके परिवार भीषण आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रहे हैं।
रैली के समापन के बाद प्रदर्शनकारियों ने संभाग आयुक्त के माध्यम से राज्यपाल के नाम एक 14 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा, जिसमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण मांगें शामिल थीं:
नक्स्ल मामलों की समीक्षा: जिन आदिवासियों के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं, उन्हें तत्काल कानूनी राहत दी जाए।
नगरनार प्लांट का निजीकरण रोकने की मांग: रैली के दौरान बस्तर के गौरव एनएमडीसी (NMDC) के जगदलपुर स्थित नगरनार इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट के रणनीतिक विनिवेश और निजीकरण का पुरजोर विरोध किया गया।
महंगाई पर नियंत्रण: खाद्य पदार्थों, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने की मांग की गई।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS): गरीबों के लिए राशन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया गया।
श्रम कानून और महिला आरक्षण: केंद्र सरकार के चार नए श्रम कोड को रद्द करने तथा महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रावधानों को पारदर्शी तरीके से लागू करने की मांग उठी। इसके साथ ही निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार देने की बात भी कही गई।
चुनावी सुधार: चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनविश्वास बनाए रखने के लिए भविष्य के चुनावों में 'बैलेट पेपर' (मतपत्र) व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई गई।
युवा संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन सिर्फ एक मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, आदिवासी अधिकारों और उद्योग जैसे तमाम जरूरी जनसरोकारों से जुड़ा हुआ है। यदि सरकार ने इन मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।