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रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अदालत से राहत नहीं मिली है। रायपुर स्थित विशेष PMLA कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता और गवाहों के प्रभावित होने की आशंका समेत अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जमानत देने से इनकार किया।
जेल में ही रहेंगे रामगोपाल अग्रवाल
ED ने रामगोपाल अग्रवाल को 11 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था। इससे पहले वे शराब घोटाले से जुड़े मामले में करीब तीन साल तक फरार रहने के बाद 8 जुलाई को रायपुर स्थित EOW कार्यालय में सरेंडर कर चुके थे। सरेंडर के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया था और जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद वे न्यायिक हिरासत में हैं।
इसके बाद अग्रवाल की ओर से विशेष PMLA कोर्ट में जमानत आवेदन लगाया गया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने जमानत के पक्ष में दलीलें रखीं, जबकि ED की ओर से मामले की गंभीरता और जांच से जुड़े पहलुओं को अदालत के सामने रखा गया। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने जमानत आवेदन खारिज कर दिया।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीर प्रकृति को ध्यान में रखा। रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट के समक्ष यह आशंका भी सामने आई कि जमानत मिलने की स्थिति में गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने अग्रवाल को फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया।
शराब घोटाले में ED की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है। ED ने अपनी कार्रवाई को EOW/ACB की FIR और मामले में दाखिल चार्जशीट व सप्लीमेंट्री चार्जशीट के आधार पर की गई जांच से जोड़ा है। ED की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अग्रवाल उस समय छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, शराब कारोबार में कथित अनियमितताओं, अवैध वसूली और पैसों के लेन-देन से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। इस मामले में कई अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो चुकी है।
कोल और शराब घोटाले दोनों मामलों से जुड़ा नाम
रामगोपाल अग्रवाल का नाम छत्तीसगढ़ के कोल लेवी और शराब घोटाले से जुड़े मामलों में भी सामने आया है। अदालत में चल रही कार्यवाही के बीच उनकी जमानत याचिका खारिज होने से फिलहाल उन्हें जेल में ही रहना होगा।
हालांकि, जमानत पर अदालत की टिप्पणियां इस चरण पर मामले की अंतिम दोषसिद्धि नहीं हैं। किसी आरोपी का दोष या निर्दोष होना अंततः ट्रायल में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगा।