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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सहमति और दुष्कर्म के अंतर को स्पष्ट करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि एक बालिग और विवाहित महिला अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाती है, तो उसे दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इस टिप्पणी के साथ ही माननीय न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है।
क्या था मामला?
मामला बेमेतरा जिले का है, जहाँ एक महिला ने अपने सहकर्मी पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। याचिका के अनुसार पीड़िता और आरोपी एक ही कृषि महाविद्यालय में मजदूरी करते थे। महिला का आरोप था कि आरोपी ने शादी का वादा कर संबंध बनाने का दबाव डाला। जुलाई 2022 में एक घटना का जिक्र करते हुए महिला ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जबकि वह उस समय पहले से ही तीन माह की गर्भवती थी। लोक-लाज के डर से देरी से रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही गई थी।
ट्रायल कोर्ट ने पहले ही गवाहों और मेडिकल रिपोर्ट के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ पीड़िता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली।