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बिलासपुर। सरकंडा थाना क्षेत्र में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामले में महिला को कथित तौर पर झूठा फंसाने के आरोपों पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि पुलिस जांच पूरी हो चुकी है और मामले में चालान सक्षम अदालत में पेश किया जा चुका है। ऐसे में कथित साजिश और बरामदगी से जुड़े तथ्यों का मूल्यांकन ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
मामला सरकंडा थाने में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के प्रकरण से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार महिला के घर से 2,925 क्लोनाजेपाम टैबलेट बरामद की गई थीं। इसके बाद महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
पति और पुलिस अधिकारी पर मिलीभगत का आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया था कि महिला के पति और एक पुलिस अधिकारी के बीच मिलीभगत थी। पारिवारिक विवाद के चलते महिला को साजिश के तहत नशीली दवाओं के मामले में फंसाया गया। इसी आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने थाना परिसर की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने, संबंधित पुलिस अधिकारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन की जानकारी मंगाने की मांग भी की थी।
पुलिस जांच में नहीं मिला साजिश का आधार
राज्य की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पुलिस जांच में जिस मेडिकल स्टोर को महिला के पति से जोड़कर देखा जा रहा था, वह उसके स्वामित्व में नहीं पाया गया। वहीं कॉल डिटेल के विश्लेषण में भी महिला के पति और संबंधित पुलिस अधिकारी के बीच किसी बातचीत के प्रमाण नहीं मिले।
कोर्ट ने कहा कि केवल वैवाहिक विवाद का होना अपने आप में कथित साजिश को साबित नहीं करता। अदालत ने यह भी माना कि बरामदगी की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठाए गए सवालों का अंतिम परीक्षण साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल कोर्ट में ही किया जाना उचित होगा।
ट्रायल कोर्ट में रख सकेंगे अपनी दलील
डिवीजन बेंच ने सीबीआई जांच, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और पुलिस अधिकारियों के कॉल डिटेल व मोबाइल लोकेशन मंगाने की मांग को खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता मामले से संबंधित उपलब्ध सामग्री और अपनी सभी दलीलें ट्रायल कोर्ट के समक्ष रख सकते हैं।
महिला को एक अलग आदेश में नियमित जमानत भी दी गई है। हालांकि हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलने का तथ्य मामले के अभियोजन पक्ष के गुण-दोष को प्रभावित नहीं करेगा। एनडीपीएस मामले में आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों का अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट द्वारा ही किया जाएगा।