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नई दिल्ली। पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी समीकरण बनता नजर आ रहा है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। करीब 10 मिनट की इस मुलाकात के बाद भाजपा और अकाली दल के बीच एक बार फिर गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, दोनों दलों की ओर से गठबंधन को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
25 साल पुरानी दोस्ती टूटने के बाद फिर नजदीकी
भाजपा और शिरोमणि अकाली दल लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में प्रमुख गठबंधन सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों का गठबंधन 1996 में हुआ था। इसके बाद 1997 के पंजाब विधानसभा चुनाव में गठबंधन को बड़ी सफलता मिली। आगे 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में भी दोनों दलों ने मिलकर सरकार बनाई।
हालांकि, कृषि कानूनों को लेकर शुरू हुए किसान आंदोलन के दौरान दोनों पार्टियों के रिश्तों में बड़ा बदलाव आया। अकाली दल ने 2020 में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा।
सुखबीर बादल की मोदी से मुलाकात ने बढ़ाई उम्मीद
सुखबीर बादल और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। इस मुलाकात ने भाजपा और शिअद के दोबारा साथ आने की संभावनाओं को हवा दे दी है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों दलों के बीच संभावित चुनावी तालमेल को लेकर चर्चा की अटकलें हैं। हालांकि बैठक में क्या बातचीत हुई और क्या 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कोई ठोस सहमति बनी, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
सीटों के बंटवारे पर बन सकता है नया फॉर्मूला
सियासी गलियारों में चर्चा है कि यदि भाजपा और अकाली दल दोबारा साथ आते हैं तो इस बार सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला पहले से अलग हो सकता है। अकाली दल लंबे समय से पंजाब में मजबूत क्षेत्रीय दल रहा है, जबकि भाजपा का शहरी क्षेत्रों और कुछ खास सामाजिक वर्गों में प्रभाव माना जाता है।
संभावित गठबंधन में दोनों पार्टियां अपने-अपने मजबूत क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए सीटों का बंटवारा कर सकती हैं। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक फॉर्मूला घोषित नहीं हुआ है।
किसान आंदोलन बना था रिश्तों में दरार की बड़ी वजह
भाजपा और अकाली दल के बीच दूरी की सबसे बड़ी वजह कृषि कानून और किसान आंदोलन को माना गया था। उस दौर में अकाली दल ने भाजपा से अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद दोनों दलों के राजनीतिक रास्ते अलग हो गए।
अब करीब छह साल बाद प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात को दोनों दलों के बीच जमी राजनीतिक बर्फ पिघलने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह मुलाकात अपने आप में गठबंधन की पुष्टि नहीं करती।
पंजाब में बदल सकते हैं चुनावी समीकरण
2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव चार प्रमुख राजनीतिक ताकतों—आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल—के बीच मुकाबले का रूप ले सकता है। ऐसे में भाजपा और अकाली दल के संभावित गठबंधन से चुनावी समीकरणों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
भाजपा और शिअद के फिर साथ आने की चर्चा के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इस मुलाकात पर तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं की मुलाकात को लेकर टिप्पणी की और संभावित राजनीतिक नजदीकी पर सवाल उठाए।
क्या फिर साथ आएंगे भाजपा और अकाली दल?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा और शिरोमणि अकाली दल 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले दोबारा गठबंधन करेंगे। मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात ने इस संभावना को जरूर मजबूत किया है, लेकिन गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला या आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
अगर दोनों दल फिर साथ आते हैं तो यह पंजाब की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा और इसका सीधा असर आम आदमी पार्टी तथा कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है।