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नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल और निर्वाचन आयोग के कुछ फैसलों को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दिल्ली के अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका में ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में लिए गए कुछ फैसलों, दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ फैसले पूर्ण निर्वाचन आयोग की सहमति के बिना लिए गए।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मामले की स्वतंत्र जांच के लिए रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाए। साथ ही, याचिका में कथित अनियमितताओं की तकनीकी, फॉरेंसिक और प्रशासनिक जांच की मांग भी की गई है।
चुनाव आयोग के फैसलों पर उठाए गए सवाल
याचिका में मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) से जुड़े फैसलों का उल्लेख किया गया है। इसमें ECINet और ERONet जैसे चुनावी डेटाबेस और सिस्टम में कथित बदलावों की जांच की मांग की गई है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि मतदाता पंजीकरण से जुड़े Form-6 की प्रक्रिया में ऐसे बदलाव किए गए, जिन पर अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं थी। याचिकाकर्ता ने पुराने वैधानिक Form-6 को बहाल करने की मांग भी रखी है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र
याचिका में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कई फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्टों के मुताबिक ऐसी आपत्तियां कम से कम 14 मौकों पर दर्ज होने का दावा किया गया है।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि व्यक्तिगत स्तर पर किसी आयुक्त की राय या आपत्ति को आयोग का अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता और SIR से जुड़े उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
CEC के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग
याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने Representation of the People Act, 1950 की धारा 32 के तहत शिकायत दर्ज करने और जांच के बाद जिम्मेदारी तय होने पर अभियोजन की दिशा में कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
कई राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन
इस विवाद के बीच कांग्रेस ने चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कई राज्यों में प्रदर्शन किए हैं। 28 सितंबर को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे और विपक्षी दलों के साथ आगे की रणनीति चर्चा के प्रमुख विषयों में रहे।
आगरा में CEC ज्ञानेश कुमार के पैतृक घर के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान दीवार पर आपत्तिजनक नारे लिखे जाने के मामले में पुलिस ने दो कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान एक होमगार्ड के साथ भी मारपीट हुई थी और मामले में हत्या के प्रयास समेत धाराओं में कार्रवाई की गई।
विवाद की अहम कड़ी
फिलहाल इस पूरे मामले में याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप और मांगें न्यायिक विचार के दायरे में हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन आरोपों को सही ठहराया जाना अलग विषय है। वहीं चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। ऐसे में आगे अदालत की कार्यवाही और आयोग का आधिकारिक पक्ष इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।