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रायपुर। CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 में कथित गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में गिरफ्तार बलरामपुर-रामानुजगंज के अतिरिक्त कलेक्टर चेतन बोरघरिया को बुधवार को ED की विशेष अदालत में पेश किया गया। ED की पूछताछ पूरी होने के बाद कोर्ट ने उन्हें 8 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। अब चेतन बोरघरिया रायपुर के सेंट्रल जेल में रहेंगे।
चेतन बोरघरिया को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 11 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद अदालत ने उन्हें 6 दिन की ED रिमांड पर भेजा था। रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद बुधवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। ED ने पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन के आधार पर मामले की आगे जांच जारी रखने की बात कही है।
3 करोड़ से ज्यादा की रकम जुटाने का आरोप
ED की जांच के मुताबिक, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 के अलग-अलग अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 3 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध रकम जुटाई।
जांच एजेंसी का आरोप है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले उपलब्ध कराने और चयन कराने का भरोसा दिया गया था। इसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में अपने कथित संपर्क और प्रभाव का इस्तेमाल करने की बात कही गई।
ED के अनुसार, इन कथित आश्वासनों के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया के नाम और उनके आधिकारिक पद का भी कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।
मोबाइल की फोरेंसिक जांच में बातचीत का खुलासा
ED ने जांच के दौरान जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई। एजेंसी के मुताबिक, इसमें चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुई बातचीत सामने आई है।
ED का दावा है कि बातचीत में वित्तीय लेन-देन, रकम वापस करने और भुगतान की मांग से संबंधित बातें शामिल हैं। एजेंसी इन डिजिटल साक्ष्यों को मामले की जांच में महत्वपूर्ण मान रही है।
कंपनी के जरिए रकम की लेयरिंग का संदेह
जांच में M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited से जुड़े कई वित्तीय लेन-देन भी सामने आने की बात ED ने कही है।
ED को संदेह है कि इस कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर रकम को अलग-अलग स्तर पर घुमाने और फंड की लेयरिंग करने के लिए किया गया। एजेंसी बैंकिंग ट्रांजैक्शन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल का पता लगाया जा सके।
PMLA के तहत गिरफ्तारी
ED के अनुसार, जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग लेन-देन और PMLA के तहत दर्ज बयानों से चेतन बोरघरिया की कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम से जुड़े विभिन्न कार्यों में संलिप्तता के संकेत मिले।
एजेंसी के मुताबिक, इनमें कथित तौर पर रकम हासिल करना, अपने कब्जे में रखना, उसे छिपाना और इस्तेमाल करना शामिल है। इन्हीं आधारों पर ED ने PMLA की धारा 19 के तहत 11 सितंबर 2026 को चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया।
ED ने बताया है कि चेतन बोरघरिया वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में अतिरिक्त कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। इससे पहले वे तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD के रूप में काम कर चुके हैं।
क्या है CGPSC 2021 मामला?
CGPSC से जुड़ा यह मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। आरोप है कि राज्य सेवा परीक्षा की प्रक्रिया में पारदर्शिता के नियमों को दरकिनार कर प्रभावशाली और राजनीतिक-प्रशासनिक संपर्क वाले परिवारों के अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया।
मामले में आरोप लगाए गए कि योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी करते हुए डिप्टी कलेक्टर, DSP और अन्य राजपत्रित पदों पर कथित तौर पर करीबी लोगों का चयन कराया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी। जांच के दौरान एजेंसी की ओर से कई स्थानों पर कार्रवाई और तलाशी की गई तथा दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया गया।
अब आगे क्या?
चेतन बोरघरिया को 8 दिन की न्यायिक रिमांड मिलने के बाद फिलहाल वे रायपुर सेंट्रल जेल में रहेंगे। वहीं ED CGPSC परीक्षा से जुड़े कथित लेन-देन, डिजिटल बातचीत, बैंकिंग रिकॉर्ड और संबंधित कंपनियों के वित्तीय लेन-देन की जांच आगे बढ़ा रही है।
नोट: ऊपर बताए गए आरोप ED की जांच और उसके द्वारा अदालत के समक्ष रखे गए दावों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।