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रायपुर। छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के दोहन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर उनके मूल्य संवर्धन और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप राज्य में खनिज आधारित गतिविधियों को केवल उत्खनन तक सीमित न रखते हुए पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (CMDC) ने बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम क्षेत्र स्थित ग्राम कुचनूर में करीब 25 वर्षों के अंतराल के बाद कोरंडम खदान का पुनः संचालन शुरू किया है। अब सरकार की योजना कोरंडम के खनन के बाद उसकी कटिंग, पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग को भी छत्तीसगढ़ में बढ़ावा देने की है।
इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में नया रायपुर स्थित मेफेयर रिजॉर्ट में CMDC और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के बीच महत्वपूर्ण एमओयू हुआ। विश्वविद्यालय को इस परियोजना में नॉलेज पार्टनर बनाया गया है। इसके माध्यम से स्थानीय युवाओं और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण देकर उन्हें कोरंडम और जेम्स्टोन से जुड़ी वैल्यू एडिशन गतिविधियों के लिए तैयार किया जाएगा।
वैज्ञानिक तरीके से हो रहा उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का उत्खनन
बीजापुर के कुचनूर क्षेत्र में कोरंडम खनिज के दोहन और विपणन के लिए CMDC तथा संयुक्त उपक्रम साझेदार मेसर्स एन.सी. नाहर के बीच गठित छत्तीसगढ़ कोरंडम माइन्स लिमिटेड के माध्यम से खदान संचालित की जा रही है।
करीब 25 साल के अंतराल के बाद फरवरी 2025 से खदान का दोबारा संचालन शुरू हुआ। यहां वैज्ञानिक पद्धति से उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का उत्खनन किया जा रहा है।
वर्तमान में खदान से निकाले गए कोरंडम का लगभग 240 किलोग्राम भंडारण बताया गया है। इसमें से 157.643 किलोग्राम कोरंडम का परिवहन किया जा चुका है। परिवहन किए गए खनिज में 107.989 किलोग्राम बी-ग्रेड तथा 49.654 किलोग्राम औद्योगिक ग्रेड कोरंडम शामिल है।
खनन से स्थानीय युवाओं को मिला रोजगार
कुचनूर कोरंडम खदान के दोबारा संचालन का असर स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। खदान की गतिविधियों से बीजापुर जिले के 14 स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।
राज्य सरकार और CMDC की रणनीति खनिज संपदा से होने वाले आर्थिक लाभ को केवल खनन कंपनियों तक सीमित रखने की बजाय स्थानीय समुदायों तक पहुंचाने की है। इसके तहत युवाओं, शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय उद्यमियों और स्टार्टअप्स को खनिज आधारित आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।
कटिंग-पॉलिशिंग से बढ़ेगी कोरंडम की कीमत
कोरंडम का वास्तविक आर्थिक मूल्य केवल उसके कच्चे खनिज के रूप में बेचने से नहीं, बल्कि उसकी कटिंग, पॉलिशिंग और डिजाइनिंग के बाद बढ़ सकता है। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर जेम्स्टोन हैंडलिंग और वैल्यू एडिशन की गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।
पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर बनाए जाने के पीछे भी यही उद्देश्य है। विश्वविद्यालय के माध्यम से स्थानीय युवाओं को आधुनिक तकनीक के आधार पर रत्नों की पहचान, जेम्स्टोन हैंडलिंग, कटिंग और पॉलिशिंग जैसी गतिविधियों में प्रशिक्षित किया जाएगा।
इससे युवाओं के लिए सिर्फ नौकरी के अवसर ही नहीं, बल्कि अपना कारोबार और छोटे उद्यम शुरू करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
‘बस्तर ब्रांड’ के तहत बाजार में उतारने की तैयारी
कुचनूर से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम को भविष्य में ‘बस्तर ब्रांड’ के तहत बाजार से जोड़ने की योजना है। स्थानीय डिजाइन, गुणवत्ता और प्रमाणिकता के साथ कोरंडम से आभूषण और अन्य रत्न उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
इस पहल के जरिए बस्तर की पारंपरिक कला और शिल्प को यहां की प्राकृतिक खनिज संपदा के साथ जोड़ा जाएगा। स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों द्वारा तैयार उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा देकर उन्हें बड़े बाजार तक पहुंचाने की कोशिश होगी।
स्टार्टअप्स, स्थानीय इकाइयों, शिल्पकारों और निवेशकों की भागीदारी से कोरंडम आधारित नए व्यवसाय विकसित किए जाने की भी संभावनाएं हैं।
बीजापुर में नए कोरंडम क्षेत्रों की तलाश जारी
सरकार का फोकस केवल कुचनूर खदान तक सीमित नहीं है। बीजापुर जिले में कोरंडम के नए संभावित क्षेत्रों की पहचान और अन्वेषण का काम भी जारी है।
भोपालपट्टनम क्षेत्र में ग्राम कुचनूर के अलावा अन्य संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर खनन गतिविधियों के विस्तार की दिशा में काम किया जा रहा है। धनगोल सहित विभिन्न क्षेत्रों को आरक्षित कर आवेदन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
नए क्षेत्रों की पहचान होने के बाद कोरंडम के उत्पादन और उससे जुड़े उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं और बढ़ सकती हैं।
पारदर्शी नीलामी से बढ़ेगा सरकारी राजस्व
उत्खनित कोरंडम की पारदर्शी तरीके से नीलामी किए जाने की योजना से राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि की उम्मीद है। साथ ही बस्तर क्षेत्र में पाए जाने वाले कोरंडम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
स्थानीय स्तर पर खनिज की कटिंग, पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण और ब्रांडिंग होने से कच्चे खनिज की तुलना में अधिक आर्थिक मूल्य पैदा किया जा सकता है। इसका सीधा फायदा स्थानीय युवाओं, कारीगरों और उद्यमियों को मिल सकता है।
‘खनन से मूल्य संवर्धन, मूल्य संवर्धन से रोजगार’ पर जोर
CMDC की यह पहल राज्य में खनिज आधारित अर्थव्यवस्था को नया स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसका उद्देश्य सिर्फ कोरंडम निकालकर बाजार में बेच देना नहीं है, बल्कि खनन से लेकर अंतिम उत्पाद और बाजार तक पूरी वैल्यू चेन को विकसित करना है।
सरकार की सोच है कि खनिज संपदा से मिलने वाला लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे और बस्तर के युवा इस पूरी प्रक्रिया में भागीदार बनें। इससे रोजगार के साथ स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा मिल सकता है।
कुल मिलाकर कुचनूर की कोरंडम खदान का पुनः संचालन बस्तर की खनिज संपदा के लिए एक नई शुरुआत है। यदि खनन के साथ कटिंग, पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण और मार्केटिंग की पूरी व्यवस्था स्थानीय स्तर पर विकसित होती है, तो कोरंडम बस्तर के लिए केवल खनिज नहीं, बल्कि रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक सशक्तिकरण का नया आधार बन सकता है।