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रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल मुक्त हो चुके वनांचल क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में कैम्पा (CAMPA) मद के तहत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन संरक्षण, पर्यावरण विकास और दूरस्थ वन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि कैम्पा मद से वन क्षेत्रों में पुल-पुलियों, पहुंच मार्गों और आवश्यक भवनों के निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने विशेष रूप से नक्सल मुक्त हुए क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास के कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया, ताकि इन सुदूर इलाकों में शासन की पहुंच मजबूत हो और लोगों को विकास योजनाओं का लाभ जल्द मिल सके।
713.73 करोड़ रुपये की कार्ययोजना अनुमोदित
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कैम्पा के तहत 713 करोड़ 73 लाख रुपये की वार्षिक कार्ययोजना अनुमोदित कर अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजी गई है। इसमें से 436 करोड़ 19 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
बैठक में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान कैम्पा मद से कराए गए विभिन्न कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
वन और वन्यजीव संरक्षण पर फोकस
अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में कैम्पा निधि से सिंचित एवं असिंचित वृक्षारोपण, क्षतिपूर्ति वनीकरण, बांस वनों की पुनर्स्थापना और वन घनत्व बढ़ाने के लिए सिल्वीकल्चरल कार्य किए जा रहे हैं। इसके अलावा वन्यप्राणी प्रबंधन, चरागाह विकास, चेक डैम और तालाबों के निर्माण के जरिए भू-जल संरक्षण तथा वन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधारने के कार्य भी जारी हैं।
बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पीसीसीएफ अरूण पाण्डेय, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, वित्त सचिव डॉ. रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण सचिव अंकित आनंद, कैम्पा सीईओ शालिनी रैना सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।