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pradeep rawat actor journey jabalpur to silver screen
हिंदी और साउथ सिनेमा के दिग्गज और दमदार अभिनेता प्रदीप रावत अब हमारे बीच नहीं रहे हैं। अपने लंबे और शानदार फिल्मी करियर में उन्होंने विलेन और सपोर्टिव रोल से एक अलग पहचान बनाई थी। आमिर खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'गजनी' में उनका खतरनाक विलेन का किरदार और 'लगान' में देवा सिंह सोढ़ी की भूमिका आज भी दर्शकों के जेहन में जिंदा है। उनका ताल्लुक मध्य प्रदेश के संस्कारधानी जबलपुर से था, जहां से उन्होंने अपने अभिनय और संघर्ष का सफर शुरू किया था।
जबलपुर में जन्मे और पले-बढ़े प्रदीप रावत ने अपनी स्कूली शिक्षा यहीं पूरी की थी। वे जबलपुर के यूनाइटेड कमर्शियल बैंक में नौकरी करते थे। फिल्मों में काम करने के जुनू्न के चलते उन्होंने बैंक में अपना ट्रांसफर मुंबई करवा लिया था, जिसके बाद उनका एक्टिंग का रास्ता साफ हुआ। बीआर चोपड़ा के लोकप्रिय धारावाहिक 'महाभारत' में अश्वत्थामा का किरदार निभाकर उन्हें घर-घर में पहली बड़ी पहचान मिली थी। प्रदीप रावत सिर्फ हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि तेलुगू सिनेमा में भी शानदार काम किया और फिल्मफेयर बेस्ट विलेन (तेलुगू) का पुरस्कार अपने नाम किया।
कैसे मिला था 'महाभारत' में अश्वत्थामा का रोल?
कथाकार पंकज स्वामी के अनुसार, प्रसिद्ध रंगकर्मी ऋषि जेना एक फिल्म बना रहे थे, जिसमें वरिष्ठ रंगकर्मी स्व. अरुण पांडे को विलेन और अभिनेता प्रदीप रावत को मुख्य अभिनेता का किरदार निभाना था। शहर में इस फिल्म की थोड़ी सी शूटिंग भी हुई थी, लेकिन किन्हीं कारणों से सिलसिला आगे नहीं बढ़ पाया। इसके बाद अभिनेता प्रदीप रावत ने शूट किए गए उसी हिस्से को बीआर चोपड़ा को दिखाया, जिससे प्रभावित होकर उन्हें 'महाभारत' में अश्वत्थामा का ऐतिहासिक रोल ऑफर हुआ।
बैंक की नौकरी के दिनों के संस्मरण
वरिष्ठ कथाकार राजे दानी बताते हैं कि अभिनेता प्रदीप रावत से उनकी गहरी मित्रता थी। प्रदीप बैंक में कार्यरत थे और उन दिनों सदर में अपनी बुलेट पर अक्सरू घूमा करते थे। घमापुर में एक फेमस सैलून हुआ करता था, जहां वे अक्सर आते-जाते थे। स्वभाव से वे बेहद मिलनसार और जिंदादिल इंसान थे। उनके निधन से कला जगत के साथ-साथ उनके गृह शहर जबलपुर में भी शोक की लहर दौड़ गई है।