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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय विभागों के मुद्रण और प्रकाशन कार्यों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि शासन स्तर से बार-बार स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बावजूद कई सरकारी विभागों के प्रकाशन, प्रचार-प्रसार और मुद्रण से जुड़े काम छत्तीसगढ़ संवाद के बजाय शासकीय मुद्रणालय के माध्यम से कराए जा रहे हैं। इसे मुख्य सचिव, वित्त सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों की अनदेखी के तौर पर देखा जा रहा है।
उपलब्ध जानकारी और प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में शासन की ओर से पहले भी कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं। वर्ष 2001, 2018 और 2019 में मुख्य सचिव स्तर से सभी प्रकार के प्रकाशन एवं प्रचार-प्रसार संबंधी कार्य छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद पिछले वर्ष वित्त सचिव मुकेश बंसल ने भी इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए आदेश जारी किया था।
वित्त सचिव के आदेश में व्यवस्था स्पष्ट
वित्त सचिव की ओर से मार्च में जारी आदेश में शासन के सभी विभागों, उपक्रमों, निगमों, मंडलों, विश्वविद्यालयों, आयोगों और अर्द्धशासकीय संस्थाओं को अपनी उपलब्धियों, योजनाओं और कार्यक्रमों पर आधारित विज्ञापन छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से अनिवार्य रूप से जारी कराने के निर्देश दिए गए थे।
आदेश में केवल विज्ञापन ही नहीं, बल्कि पुस्तिका और पुस्तकों का मुद्रण, प्रचार सामग्री, होर्डिंग्स, विज्ञापन सामग्री की डिजाइनिंग, फिल्म और वृत्तचित्र निर्माण सहित विभिन्न प्रचार-प्रसार संबंधी कार्य भी छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से कराने की बात कही गई थी। इसके पीछे सरकारी कार्यों में गुणवत्ता, एकरूपता और शासन की मंशा के अनुरूप कार्य सुनिश्चित करना उद्देश्य बताया गया था।
दूसरे माध्यम से काम कराने के लिए NOC जरूरी
शासन के निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कारणवश छत्तीसगढ़ संवाद किसी कार्य को कराने में सक्षम नहीं है, तो उसके द्वारा संबंधित विभाग को अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी किया जाएगा।
इस NOC के बिना किसी विभाग, निगम, मंडल या अर्द्धशासकीय संस्था को संबंधित मुद्रण या प्रचार-प्रसार का काम किसी अन्य संस्था अथवा माध्यम से कराने की अनुमति नहीं होगी।
आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से काम नहीं कराकर किसी अन्य संस्था से कार्य कराया जाता है, तो अनापत्ति प्रमाण-पत्र के अभाव में संबंधित बिलों का भुगतान कोषालयों से नहीं किया जाएगा।
कोषालय अधिकारियों को भी दिए गए निर्देश
व्यवस्था के प्रभावी पालन के लिए उन विभागों, उपक्रमों, मंडलों और अर्द्धशासकीय संस्थाओं को भी निर्देशित किया गया है, जहां छत्तीसगढ़ राज्य वित्त संवर्ग अथवा छत्तीसगढ़ अधीनस्थ लेखा संवर्ग के अधिकारी पदस्थ हैं। राज्य के सभी कोषालय अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से कराए गए कार्यों का भुगतान नियमानुसार किया जाए और निर्देशों का उल्लंघन होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
हर साल करीब 400 करोड़ के मुद्रण कार्य का दावा
मामले को लेकर सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदेश के विभिन्न शासकीय विभागों से हर साल करीब 400 करोड़ रुपये के मुद्रण संबंधी कार्य कराए जाते हैं। आरोप है कि इन कार्यों का एक बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा मुद्रकों को दिए जाने को लेकर शिकायतें भी उच्च स्तर पर की जाती रही हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन यदि सरकारी निर्देशों के बावजूद निर्धारित प्रक्रिया से अलग जाकर काम कराया जा रहा है, तो इससे शासन की तय व्यवस्था और उसकी निगरानी प्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आदेशों के बाद भी व्यवस्था में बदलाव नहीं आने का आरोप
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब मुख्य सचिव स्तर से कई वर्ष पहले ही निर्देश जारी किए जा चुके थे और वित्त सचिव की ओर से भी हाल में इनके कड़ाई से पालन के निर्देश दिए गए, तो इसके बावजूद शासकीय मुद्रणालय के माध्यम से सरकारी विभागों के मुद्रण कार्य किस आधार पर जारी हैं।
शासकीय गलियारों में इस मामले को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी चर्चा शुरू हो गई है। सवाल यह भी है कि यदि शासन का उद्देश्य मुद्रण एवं प्रचार-प्रसार कार्यों में गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित करना है, तो बार-बार आदेश जारी होने के बाद भी जमीनी स्तर पर पूरी तरह से इसका पालन क्यों नहीं हो पा रहा है।
अब नजर इस बात पर है कि शासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या संबंधित विभागों से निर्देशों के उल्लंघन को लेकर जवाब मांगा जाता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि करीब 400 करोड़ रुपये के बताए जा रहे वार्षिक मुद्रण कार्यों की प्रक्रिया और उनके आवंटन की पारदर्शिता को लेकर शासन स्तर पर कोई समीक्षा की जाती है या नहीं।