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chhattisgarh high court teacher dismissal order quashed departmental inquiry
बिलासपुर। छात्रा को कथित रूप से आपत्तिजनक व्हाट्सएप संदेश भेजने और वीडियो कॉल करने के आरोप में बर्खास्त किए गए एक शिक्षक को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने विभाग द्वारा जारी सेवा समाप्ति के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि बिना विभागीय जांच और पर्याप्त कारण दर्ज किए किसी कर्मचारी को सीधे बर्खास्त करना कानून और सेवा नियमों के अनुरूप नहीं है।
मामला बिल्हा विकासखंड के एक सरकारी स्कूल में पदस्थ शिक्षक कमलेश कुमार साहू से जुड़ा है। शिक्षक पर एक छात्रा को अश्लील व्हाट्सएप संदेश भेजने और वीडियो कॉल करने के आरोप लगे थे। आरोपों के आधार पर स्कूल शिक्षा विभाग ने 7 फरवरी 2025 को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-10 के तहत उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
बर्खास्तगी के खिलाफ शिक्षक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि विभाग ने उन्हें न तो कारण बताओ नोटिस जारी किया और न ही विभागीय जांच कराई। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना सीधे सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने कहा कि किसी भी कर्मचारी पर गंभीर आरोप होने की स्थिति में भी विभागीय जांच की प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना जांच और पर्याप्त कारण दर्ज किए पारित बर्खास्तगी का आदेश न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने शिक्षक की सेवा समाप्ति का आदेश निरस्त कर दिया। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि स्कूल शिक्षा विभाग उचित समझे तो वह नियमों के तहत विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाकर विभागीय जांच के बाद दोबारा कार्रवाई कर सकता है।