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A new challenge following the record increase in medical seats: will the quality of education be maintained?
रायपुर। प्रदेश में मेडिकल शिक्षा का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। इस वर्ष पांच सरकारी और एक निजी मेडिकल कॉलेज को मान्यता मिलने के साथ एमबीबीएस की 350 नई सीटें जुड़ी हैं। वहीं पहले से संचालित मेडिकल कॉलेजों में भी 245 सीटों का विस्तार किया गया है। इस तरह एक ही साल में कुल 595 सीटों की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सीटें बढ़ाने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।
नए शैक्षणिक सत्र के लिए कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, गीदम और कुनकुरी के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी मिली है। इन पांचों कॉलेजों में 50-50 सीटों के हिसाब से कुल 250 विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा। वहीं रायपुर के मां पद्मावती मेडिकल कॉलेज को निजी क्षेत्र में 100 एमबीबीएस सीटों की स्वीकृति प्रदान की गई है।
केवल नए कॉलेज ही नहीं, बल्कि पहले से संचालित संस्थानों में भी सीटों का विस्तार किया गया है। नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर में 20, जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में 25, रिम्स में 100 तथा अभिषेक और रावतपुरा मेडिकल कॉलेज में 50-50 अतिरिक्त सीटें जोड़ी गई हैं। इससे कुल 245 नई सीटें पुराने संस्थानों में उपलब्ध हुई हैं।
सीटों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा लाभ मेडिकल में प्रवेश की तैयारी कर रहे छात्रों को मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक सीटें उपलब्ध होने से प्रवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी और कटऑफ में भी कुछ राहत देखने को मिल सकती है।
मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कॉलेज और सीटें बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। गुणवत्तापूर्ण मेडिकल शिक्षा के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं, अस्पतालों में पर्याप्त क्लीनिकल एक्सपोजर, अनुभवी शिक्षकों की उपलब्धता और मजबूत शैक्षणिक व्यवस्था अनिवार्य है। यदि इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में बेहतर डॉक्टर तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
राज्य गठन के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जहां एमबीबीएस की 100 सीटें उपलब्ध थीं। आज 26 वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या करीब 21 गुना और एमबीबीएस सीटें लगभग 29 गुना तक बढ़ चुकी हैं। केवल पिछले एक वर्ष में ही सीटों में 25.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में शामिल है।
फिलहाल अगले शैक्षणिक सत्र में किसी नए सरकारी मेडिकल कॉलेज के शुरू होने की संभावना नहीं जताई जा रही है। हालांकि एक निजी मेडिकल कॉलेज के शुरू होने की संभावना बनी हुई है और यह प्रस्ताव अभी प्रक्रिया में है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी मेडिकल शिक्षा का लगातार विस्तार हो रहा है। मौजूदा सत्र में देशभर में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है। वहीं एमबीबीएस सीटों की संख्या 1 लाख 36 हजार 939 तक पहुंच चुकी है। इस वर्ष देशभर में करीब 9911 नई सीटें जोड़ी गई हैं।
रिटायर्ड कुलपति डॉ. ए.के. चंद्राकर का कहना है कि मेडिकल कॉलेज और सीटों की संख्या बढ़ना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन इसके साथ शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और योग्य शिक्षकों के बिना कुशल डॉक्टर तैयार नहीं किए जा सकते।श्री बालाजी मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन डॉ. वेवेंद्र नायक का कहना है कि नीट यूजी जैसी कठिन परीक्षा पास कर आने वाले विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन और उच्च स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि पर्याप्त फैकल्टी और मजबूत शैक्षणिक व्यवस्था के माध्यम से ही योग्य और दक्ष डॉक्टर तैयार किए जा सकते हैं।