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Chhattisgarh: Lord Jagannath's Rath Yatra taken out in Raipur with devotion and faith; Governor Ramen Deka and Chief Minister Sai participated.
रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में गुरुवार को भव्य रथयात्रा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और जयघोष से गुंजायमान रहा।
रथयात्रा प्रारंभ होने से पहले राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सोने की झाड़ू से 'छेरा-पहरा' की रस्म निभाई। इस दौरान रथमार्ग का प्रतीकात्मक शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को विधि-विधान के साथ रथ पर विराजित कर रथयात्रा का शुभारंभ किया गया।
राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को रथयात्रा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता, लोकपरंपरा और जन-जन की आस्था का महापर्व है। उन्होंने कहा कि यह पर्व समाज को सेवा, समर्पण, समानता और लोककल्याण का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भगवान जगन्नाथ किसानों के आराध्य और अन्नदाता के रक्षक माने जाते हैं। उनकी कृपा से समय पर वर्षा होती है, खेतों में हरियाली आती है और किसानों के जीवन में समृद्धि का संचार होता है। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की कि इस वर्ष प्रदेश में भरपूर वर्षा हो, कृषि समृद्ध बने, किसानों की मेहनत सफल हो और छत्तीसगढ़ निरंतर विकास एवं खुशहाली के मार्ग पर आगे बढ़ता रहे।
उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का आशीर्वाद सभी प्रदेशवासियों पर बना रहे तथा सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार हो। ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में सद्भाव, एकता और सामूहिक चेतना को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
गौरतलब है कि रायपुर के गायत्री नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में प्रतिवर्ष ओडिशा के पुरी की विश्वविख्यात रथयात्रा की तर्ज पर यह आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाता है। 'छेरा-पहरा' की परंपरा इस बात का प्रतीक मानी जाती है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।
ओडिशा का पड़ोसी राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ में भगवान जगन्नाथ के प्रति विशेष श्रद्धा और आस्था रही है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में रथयात्रा का आयोजन उत्साहपूर्वक किया जाता है। यह पर्व उत्कल संस्कृति और दक्षिण कोसल की सांस्कृतिक परंपराओं के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करता है।
इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न निगम-मंडलों एवं आयोगों के अध्यक्ष, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।